पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय ने टीवी धारावाहिक 'राम सिया के लव कुश' के प्रसारण पर लगी रोक हटाने से किया इनकार

पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय ने टीवी धारावाहिक

पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय ने टीवी धारावाहिक 'राम सिया के लव कुश' के प्रसारण पर लगी रोक को हटाने से लगाने से इनकार कर दिया है।

पंजाब के विभिन्न जिला मजिस्ट्रेटों ने कलर टीवी द्वारा प्रसरित टीवी सीरियल के प्रसारण को इस आधार पर प्रतिबंधित कर दिया था कि जिलों में वाल्मीकि समुदाय की एक बड़ी आबादी है और सीरियल की स्क्रीनिंग को लेकर उनमें नाराजगी है। आरोप यह है कि धारावाहिक भगवान वाल्मीकि जी के बारे में गलत तथ्यों को चित्रित कर रहा है और वाल्मीकि रामायण के इतिहास को विकृत कर रहा है।

प्रसारण पर पाबंदी लगने के बाद कलर टीवी ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया। यह न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत किया गया था कि निर्माता इस मुद्दे पर चर्चा के लिए तैयार हैं और यदि धारावाहिक में ऐसे कुछ दृश्यों को हटाना पड़े जो भगवान वाल्मीकि जी की भूमिका को चित्रित करते हैं, तो वे इस पर बात कर सकते हैं।

यह आरोप लगाया गया कि प्रतिबंध के आदेश जारी करने से पहले कलर टीवी को सुनवाई का कोई अवसर नहीं दिया गया था। न्यायमूर्ति तेजिंदर सिंह ढींडसा ने 12 सितंबर को मामले की सुनवाई की तारीख देते हुए याचिका पर अंतरिम रोक लगाने से इनकार कर दिया।

हालाँकि, धारावाहिक के निर्माताओं द्वारा दायर एक याचिका में, उच्च न्यायालय ने (29 अगस्त को) उनके खिलाफ शुरू की गई आपराधिक कार्रवाई पर रोक लगा दी। उक्त याचिका में, यह तर्क दिया गया कि धारावाहिक के निर्माता की ओर से महाकाव्य में कोई जोड़ या घटाव के बिना धारावाहिक का विवादित हिस्सा मूल संस्करण के वास्तविक पाठ पर आधारित है और इस तरह से समाज के किसी भी वर्ग के किसी भी भावना को जानबूझकर ठेस पहुंचाने का कोई इरादा नहीं है।