BCCI में सुधार के मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट ने एमिक्स PS नरसिम्हा को मध्यस्थ बनाया, कहा खेल चलते रहना चाहिए

BCCI में सुधार के मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट ने एमिक्स PS नरसिम्हा को मध्यस्थ बनाया, कहा खेल चलते रहना चाहिए

BCCI में सुधार को लेकर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने मामले से संबंधित सभी मुद्दों के निपटारे के लिए एमिकस क्यूरी और वरिष्ठ वकील पी. एस. नरसिम्हा को मध्यस्थ नियुक्त किया है।

गुरुवार को हुई सुनवाई में जस्टिस एस. ए. बोबड़े और जस्टिस ए. एम. सपरे की पीठ ने सभी सदस्य क्रिकेट संघों से कहा है कि वो नरसिम्हा से इस मामले में सलाह करें और इसके बाद एमिकस CoA को सिफारिश करेंगे।

पीठ ने BCCI सदस्य क्रिकेट संघों को धन जारी करने के मामले में उनकी दलीलों पर अमिक्स नरसिम्हा द्वारा सुनवाई करने और CoA को उचित सिफारिशें देने का आदेश दिया। वहीं BCCI के सदस्यों ने कहा कि वे लोढ़ा समिति की सिफारिशों को मानने को तैयार हैं लेकिन नए बीसीसीआई संविधान में कई प्रावधान हैं जो लोढ़ा सिफारिशों से परे हैं।

पीठ ने कहा कि इसके बाद भी अगर किसी संघ सदस्य को शिकायत रहती है तो वो कोर्ट में आ सकता है। पीठ ने साफ किया कि खेल चलते रहना चाहिए। 21 फरवरी को सुप्रीम कोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के सेवानिवृत्त न्यायाधीश न्यायमूर्ति डी. के. जैन को BCCI का पहला ऑम्बड्समैन नियुक्त किया था। सुप्रीम कोर्ट ने पिछले साल 9 अगस्त को BCCI के नए संविधान को अनुमोदित किया था।

पीठ ने BCCI और राज्य निकायों को चलाने वाली प्रशासकों की समिति के बीच चल रही खटपट को शांत करने के लिए एमिकस क्यूरी और वरिष्ठ वकील पी. एस. नरसिम्हा की सलाह पर चीजों को अपने हाथों में लेने का फैसला किया था।

अदालत ने ये हस्तक्षेप राज्य संघों के लिए पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता और वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल द्वारा सवाल उठाने के बाद किया जब उन्होंने कहा था कि BCCI को CoA द्वारा उन पर थोपा गया ऑम्बड्समैन नहीं चाहिए। उन्होंने शुरू में कहा था कि ऑम्बड्समैन की नियुक्ति बीसीसीआई चुनाव तक इंतजार कर सकती है। लेकिन जब अदालत ने उन्हें 6 नामों की सूची दी तो सभी ने सुप्रीम कोर्ट के सेवानिवृत्त जज न्यायमूर्ति जैन पर सर्वसम्मति से सहमति व्यक्त की।

न्यायमूर्ति जैन से न्यायालय ने अनुरोध किया था कि वो ऑम्बड्समैन के रूप में "जितनी जल्दी हो सके" पद संभाल लें। हाल ही में सुप्रीम कोर्ट में दाखिल CoA की एक रिपोर्ट के बाद कि BCCI के नए संविधान के तहत आंतरिक विवाद के तहत हल करने के लिए ऑम्बड्समैन की नियुक्ति का रास्ता खुला जिसके तहत सेवानिवृत्त सुप्रीम कोर्ट के जज या नियुक्त उच्च न्यायालय के पूर्व मुख्य न्यायाधीश को 1 साल के लिए नियुक्त किया जा सकता है।

जस्टिस जैन के लिए अब पहला काम बीसीसीआई के सीईओ राहुल जौहरी के खिलाफ यौन उत्पीड़न के आरोपों को देखना है। CoA ने यह भी बताया था कि क्रिकेटर हार्दिक पांड्या और के. एल. राहुल द्वारा करन जौहर के चैट शो में की गई टिप्पणी पर विवाद को भी ऑम्बड्समैन के समक्ष रखा जा सकता है।

इस बीच जस्टिस बोबड़े ने नरसिम्हा से कहा कि वे CoA के 2 सदस्यों - पूर्व कंट्रोलर और ऑडिटर जनरल विनोद राय और पूर्व भारतीय महिला क्रिकेट खिलाड़ी डायना एडुल्जी को सलाह दें कि वो अपने मतभेदों को सार्वजनिक न करें।

एमिकस क्यूरी ने कहा था कि CoA के लिए तीसरे सदस्य को नियुक्त करने की आवश्यकता है जो स्थान 2 सदस्यों - विक्रम लिमये और रामचंद्र गुहा के बाहर निकलने बाद रिक्त हो गया है। अदालत ने कहा कि "कोई उनके दिमाग में है" और वे अपने चेंबर में पार्टियों के साथ नाम पर चर्चा कर फैसला करेंगे।

वहीं राज्य संघों ने शिकायत की थी कि बीसीसीआई के भीतर उनकी स्थिति "अनिश्चित" हो गई है। जब नरसिम्हा ने प्रस्तुत किया कि उच्चतम न्यायालय में बीसीसीआई केस की "यात्रा" तीन-चौथाई पूरी हो चुकी है तो मेहता ने कहा कि "यात्रा गलत दिशा में है।" उन्होंने कहा कि बीसीसीआई का पूरा पैसा "CoA (राय और एडुल्जी) के दो2 लोगों द्वारा संचालित किया जाता है।"

"हम अपने पैसे के लिए भीख माँग रहे हैं," मेहता ने कहा। सिब्बल ने कहा, "पिछले 3 सालों से हमें एक पैसा भी नहीं दिया गया है।"

एक बिंदु पर CoA के लिए वरिष्ठ वकील पराग त्रिपाठी ने अदालत को सूचित किया था कि "सब कुछ किया जा रहा है। हम केवल चुनाव कराने के लिए अदालत की सहमति का इंतजार कर रहे हैं।" इस बीच अदालत ने कहा था कि एक बार CoA के नए सदस्य के नियुक्त होने के बाद वो धन देने के लिए एमिकस क्यूरी की सलाह ले सकता है।