जांच अधिकारी की चूक का फ़ायदा आरोपी को नहीं मिल सकता : सुप्रीम कोर्ट

जांच अधिकारी की चूक का फ़ायदा आरोपी को नहीं मिल सकता : सुप्रीम कोर्ट

एक आपराधिक अपील को खारिज करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि अगर कोई जांच अधिकारी कोई भूल-चूक करता है तो इसका फ़ायदा आरोपी को नहीं पहुंचाया जा सकता।

न्यायमूर्ति आर बानुमती, न्यायमूर्ति एएस हृषिकेश रॉय ने हत्या के एक मामले में आरोपी को बरी किये जाने के इलाहाबाद हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ दायर शिकायत पर गौर करते हुए यह फैसला सुनाया।

यह मामला जय प्रकाश बनाम उत्तर प्रदेश राज्य का था जिसमें आरोपी को घटना के अगले दिन ही गिरफ्तार कर लिया गया था, लेकिन वारदात में शामिल हथियार की बरामदगी नहीं हो पाई थी।

पीठ ने कहा कि हथियार आदि के नहीं मिलने जैसी बातों को दखते हुए अभियोजन के मामले को इसकी परिधि के बाहर गौर किया जाना है, लेकिन अभियोजन के सबूतों में ठोस विसंगतियां और अभियोजन के मामले के अप्राकृतिक चरित्र, अपराध में शामिल हथियार और उसके खोखे का बरामद नहीं होना आदि अभियोजन के मामले के प्रति गंभीर संदेह पैदा करता है।

हाईकोर्ट के फैसले में यह कहा गया कि मृतक दागी गई गोलियों के खोखे बरामद नहीं होने, आरोपी ने जिस हथियार का प्रयोग किया था उस हथियार का नहीं मिलना आदि जांच में हुई गंभीर अनियमितताएं थीं।

इस बारे में अदालत ने कहा,


"यह स्थापित हो चुका है कि जांच अधिकारी से जो चूक होती है वह अभियोजन के खिलाफ नहीं जा सकता. अगर जांच अधिकारी ने जान बूझकर वह नहीं किया है जो उसे न्याय के हित में करना चाहिए, तो इसका अर्थ यह हुआ कि इस तरह का कार्य या चूक का लाभ आरोपी को नहीं दिया जा सकता।
अभियोजन के मामले पर सिर्फ इस आधार पर संदेह नहीं किया जा सकता क्योंकि हथियार और अन्य सा सबूत नहीं मिले...जांच अधिकारी की कोई भी चूक आरोपी को फ़ायदा नहीं पहुंचा सकता, लेकिन इस तरह के मामले में जहां यह कहा गया है कि अपराध होने के आधे घंटे के भीतर एफआईआर दर्ज ओ गया और जांच भी तभी शुरू हो गई, हमें इसका कारण नहीं नजर आता कि घटनास्थल से कारतूस के खाली डिब्बे और बर्स्ट्स बरामद क्यों नहीं हुए।"


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