सुप्रीम कोर्ट ने अरूणाचल के CM पर रेप के आरोप लगाने वाली महिला पर सवाल उठाए, याचिका पर सुनवाई से इनकार

सुप्रीम कोर्ट ने अरूणाचल के CM पर रेप के आरोप लगाने वाली महिला पर सवाल उठाए, याचिका पर सुनवाई से इनकार

सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को अरुणाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री पेमा खांडू सहित 4 व्यक्तियों द्वारा सामूहिक बलात्कार का शिकार होने का आरोप लगाने वाली महिला की उस याचिका पर सुनवाई से इनकार कर दिया जिसमें मामले की जांच और पुलिस सुरक्षा की मांग की गई थी।

सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाली पीठ ने याचिकाकर्ता पर सवाल उठाए और कहा कि घटना वर्ष 2008 में हुई और वर्ष 2015 में इसकी शिकायत की गई। ये शिकायत एक संवैधानिक हस्ती के खिलाफ है।

अदालत ने याचिकाकर्ता को अपनी शिकायतों के साथ सक्षम उच्च न्यायालय से संपर्क करने की अनुमति दी और कहा कि पुलिस सुरक्षा की मांग करने के लिए वो संबंधित प्राधिकरण के पास जाने के लिए स्वतंत्र है।

सुरक्षा के अलावा याचिकाकर्ता ने अपने आरोपों पर पुलिस की निष्क्रियता के खिलाफ उचित कानूनी सहारा लेने के लिए दिल्ली उच्च न्यायालय से संपर्क करने की अनुमति भी मांगी थी।याचिकाकर्ता ने कहा कि वह स्वेच्छा से अपने आरोपों की सत्यता की स्थापना के लिए नार्को एनालिसिस/पॉलीग्राफ टेस्ट की प्रक्रिया से गुजरने को तैयार है।

याचिकाकर्ता के मुताबिक याचिकाकर्ता घटना के समय 15 वर्ष की थी और अरुणाचल प्रदेश में एक कार्यालय में काम कर रही थी। कथित तौर पर उसे एक व्यक्ति ने सरकारी नौकरी दिलाने के बहाने एक बैठक में बुलाया था। इस बैठक के दौरान पेमा खांडू ने खुद को एक आर्मी कर्नल के रूप में पेश किया जबकि वहां 2 अन्य लोग भी थे।

वह बताती है कि इस बैठक के दौरान उसे नशीला पदार्थ पिलाया गया, जिसके बाद 4 लोगों ने उसके साथ कथित तौर पर बलात्कार किया। होश में आने के बाद उसने दावा किया है कि उसे थप्पड़ मारा गया था और खांडू द्वारा गंभीर परिणाम भुगतने की चेतावनी दी गई थी। धमकी के कारण उसने औपचारिक शिकायत दर्ज नहीं कराई।

याचिकाकर्ता का तर्क है कि शुरू में वह आरोपियों की वास्तविक पहचान नहीं जानती थी और उसने वर्ष 2012 में खांडू की पहचान तब की जब उसने अखबार में उनकी तस्वीरों को देखा। उस वक्त वो अरुणाचल प्रदेश के पर्यटन मंत्री थे। उसने वर्ष 2015 में एक औपचारिक शिकायत भी दर्ज की थी लेकिन ईटानगर के पुलिस अधिकारी इसे पंजीकृत करने के लिए अनिच्छुक थे।

मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट के समक्ष एक अन्य याचिका में पुलिस अधिकारियों को एक प्राथमिकी दर्ज करने के लिए निर्देश देने की मांग को भी खारिज कर दिया गया। राष्ट्रीय महिला आयोग भी उसकी शिकायत पर कार्रवाई करने में विफल रहा। इसलिए उन्होंने अब सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। कहा गया है कि याचिकाकर्ता को आपराधिक मामलों की धमकी दी जाती है और उसके खिलाफ पहले से ही एक मानहानि का मामला दर्ज है जिसमें निरोधक आदेश पारित किया गया है।