जस्टिस अनिरुद्ध बोस और जस्टिस AS बोपन्ना को SC जज बनाने की सिफारिश को SC कॉलेजियम ने फिर दोहराया, केंद्र की आपत्ति खारिज

जस्टिस अनिरुद्ध बोस और जस्टिस AS बोपन्ना को SC जज बनाने की सिफारिश को SC कॉलेजियम ने फिर दोहराया, केंद्र की आपत्ति खारिज

केंद्र सरकार की आपत्ति को दरकिनार करते हुए सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने अपनी उस सिफारिश को दोहराया है जिसमें झारखंड उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस अनिरुद्ध बोस और गुवाहाटी उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस ए. एस. बोपन्ना को सुप्रीम कोर्ट में जज नियुक्त करने को कहा था।

कॉलेजियम ने अपनी सिफारिश को वापस केंद्र को भेजते हुए कहा है कि वरिष्ठता को इन मामलों में देखा जाता है लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने पहले ही ये भी तय किया है कि वरिष्ठता के अलावा किसी हाई कोर्ट जज को सुप्रीम कोर्ट का जज नियुक्त करने के लिए योग्यता को उससे ज्यादा तरजीह दी जानी चाहिए। इसलिए कॉलेजियम सारे तथ्यों पर विचार कर दोबारा इस सिफारिश को भेज रहा है।

वरिष्ठता क्रम के आधार पर केंद्र ने सिफारिश भेजी वापस
इससे पहले केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम की सिफारिश को वापस लौटा दिया था। 12 अप्रैल को सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने झारखंड उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस अनिरुद्ध बोस और गुवाहाटी उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस ए. एस. बोपन्ना को सुप्रीम कोर्ट में जज नियुक्त करने की सिफारिश की थी।

जस्टिस अनिरुद्ध बोस संयुक्त वरिष्ठता में हैं 12 वें क्रम पर
बताते चलें कि जस्टिस अनिरुद्ध बोस को 19 जनवरी, 2004 को कलकत्ता उच्च न्यायालय के न्यायाधीश के रूप में नियुक्त किया गया था और 11 अगस्त 2018 को उन्हें झारखंड उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश के रूप में पदोन्नत किया गया था। गौरतलब है कि जस्टिस बोस अखिल भारतीय आधार पर उच्च न्यायालय के न्यायाधीशों की संयुक्त वरिष्ठता में 12 वें क्रम पर हैं।

जस्टिस बोपन्ना संयुक्त वरिष्ठता में हैं 36 वें क्रम पर
जस्टिस ए. एस. बोपन्ना को 6 जनवरी, 2006 को कर्नाटक उच्च न्यायालय के न्यायाधीश के रूप में नियुक्त किया गया था और 29 अक्टूबर, 2018 को उन्हें गुवाहाटी उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश के रूप में पदोन्नत किया गया। जस्टिस बोपन्ना अखिल भारतीय आधार पर उच्च न्यायालय के न्यायाधीशों की संयुक्त वरिष्ठता में 36 वें क्रम पर हैं।

सुप्रीम कोर्ट 31 न्यायाधीश के स्वीकृत पदों के विरूद्ध मौजूदा समय में 27 न्यायाधीशों के साथ कार्य कर रहा है। 4 पद अभी भी खाली हैं।