सुप्रीम कोर्ट ने बंगला खाली कराने के खिलाफ तेजस्वी यादव की याचिका खारिज़ की, 50 हज़ार का ज़ुर्माना भी लगाया

सुप्रीम कोर्ट ने बंगला खाली कराने के खिलाफ तेजस्वी यादव की याचिका खारिज़ की, 50 हज़ार का ज़ुर्माना भी लगाया

राष्ट्रीय जनता दल के नेता, बिहार के पूर्व उपमुख्यमंत्री और लालू प्रसाद यादव के बेटे तेजस्वी यादव की याचिका को सुप्रीम कोर्ट ने खारिज़ कर दिया है। दरअसल यह याचिका, तेजस्वी ने पटना हाईकोर्ट के उस आदेश को चुनौती देते हुए उच्चतम न्यायालय में दाखिल की थी जिसमें उन्हें उपमुख्यमंत्री के रूप में मिला सरकारी बंगला खाली कर नेता विपक्ष के बंगले में जाने का आदेश दिया गया था।

मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई, जस्टिस दीपक गुप्ता और संजीव खन्ना की पीठ ने पूर्व उपमुख्यमंत्री द्वारा दाखिल इस याचिका को खारिज करते हुए याचिकाकर्ता पर फैसले को चुनौती देने के लिए 50,000 रुपये का जुर्माना भी लगाया।

दरअसल यादव, जो अब राज्य विधानसभा में विपक्ष के नेता हैं, को बिहार सरकार द्वारा उन्हें उपमुख्यमंत्री के रूप में दिए गए आधिकारिक बंगले को खाली करने के लिए कहा गया था ताकि इसे वर्तमान उपमुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी को आवंटित किया जा सके। उन्होंने इस फैसले पर सवाल उठाया जिसके बाद पटना उच्च न्यायालय की एकल पीठ ने उनकी याचिका खारिज कर दी।

यादव ने इस फैसले को खंडपीठ में चुनौती दी और 7 जनवरी 2019 को खंडपीठ ने एकल पीठ के आदेश की पुष्टि कर दी। पटना उच्च न्यायालय ने यादव की याचिका पर अपने आदेश में कहा था कि "याचिकाकर्ता को 1, पोलो रोड, पटना में सरकार में मंत्री के रूप में उनकी स्थिति से मेल खाते हुए एक बंगला आवंटित किया गया है। वह इस निर्णय को लेकर सिर्फ इसलिए

शिकायत नहीं कर सकते क्योंकि वर्तमान बंगला उनके लिए अधिक अनुकूल है।"

इस फैसले को चुनौती देने पर शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई की और वरिष्ठ वकील अभिषेक मनु सिंघवी ने तेजस्वी यादव का पक्ष रखा। पीठ ने याचिका खारिज़ करते हुए हाई कोर्ट के आदेश को चुनौती देने और न्यायालय का कीमती समय बर्बाद करने के चलते यादव पर 50,000 रुपये का जुर्माना भी लगाया।