मायावती को जनता के पैसे से बनाई मूर्तियों के रुपये वापस करने चाहिए : सुप्रीम कोर्ट की मौखिक टिप्पणी

मायावती को जनता के पैसे से बनाई मूर्तियों के रुपये वापस करने चाहिए : सुप्रीम कोर्ट की मौखिक टिप्पणी

बहुजन समाज पार्टी की सुप्रीमो मायावती के लिए मुश्किलें बढ़ाते हुए सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को मौखिक टिप्पणी की कि उत्तर प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री को सार्वजनिक जगहों पर सरकारी खर्च से लगाई गईं हाथियों की प्रतिमा पर खर्च रुपयों को वापस करना चाहिए।

भारत के मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई ने मायावती के वकील राकेश खन्ना से बसपा सुप्रीमो तक अदालत की बात पहुँचा देने के उद्देश्य से कहा कि, "मैडम मायावती, हमारा प्रारंभिक विचार ये है कि हाथियों की प्रतिमाओं पर खर्च जनता के पैसे का भुगतान आप अपनी जेब से करें।"

पीठ ने बसपा की ओर से पेश सतीश मिश्रा के अनुरोध को खारिज कर दिया कि मामले की सुनवाई मई 2019 तक के लिए टाल दी जाए। भारत के मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई, न्यायमूर्ति दीपक गुप्ता और न्यायमूर्ति संजीव खन्ना की पीठ ने 10 साल पुराने इस मामले की अंतिम सुनवाई के लिए 2 अप्रैल की तारीख तय की है।

अदालत, वकील रविकांत द्वारा नोएडा में एक पार्क सहित सार्वजनिक स्थानों पर मूर्तियों को स्थापित करने के लिए करोड़ों रुपये के सार्वजनिक धन के दुरुपयोग का आरोप लगाते हुए दाखिल जनहित याचिका पर सुनवाई कर रही थी।




वर्ष 2009 में दायर की गई इस जनहित याचिका में मायावती को सरकारी खजाने की कीमत पर सार्वजनिक स्थानों पर प्रतिमाएं स्थापित करने से रोकने की मांग की गई थी और इस मामले की सीबीआई जांच की मांग भी की गई थी। याचिका में आरोप लगाया गया है कि जनता के सैकड़ों करोड़ रुपये, उत्तर प्रदेश की तत्कालीन मुख्यमंत्री की झूठी गरिमा दिेखाने के लिए खर्च किए गए थे।

इस गतिविधि को राज्य की नीति के रूप में किया जा गया जो संविधान के अनुच्छेद 14 के तहत मनमाना और उल्लंघन है। याचिका में कहा गया है कि सार्वजनिक स्थानों पर हाथी यानी बसपा के पार्टी चुनाव चिन्ह 52.20 करोड़ रुपये की लागत से स्थापित किए गए थे। राज्य के धन का उपयोग करके ये किया गया था। याचिका में यह भी कहा गया है कि राज्य सरकार को सार्वजनिक भूमि से मायावती और उनकी पार्टी के चुनाव चिन्ह की मूर्तियों को हटाने का निर्देश दिया जाए।

इमेज कर्टसी