CIC और सूचना आयुक्त की नियुक्ति : सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र से पारदर्शिता बरतने को कहा

CIC और सूचना आयुक्त की नियुक्ति : सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र से पारदर्शिता बरतने को कहा

केंद्रीय और राज्य सूचना आयोग में मुख्य सूचना आयुक्त और सूचना आयुक्त के पदों की रिक्तियों के मामले में सुनवाई करते हुए गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से कहा है कि इन नियुक्तियों की प्रक्रिया में पारदर्शी तरीका अपनाया जाना चाहिए।

जस्टिस एके सीकरी की पीठ ने कहा कि आखिरकार ये सब पारदर्शिता के लिए ही किया जा रहा है। सरकार को चयनित  उम्मीदवारों की सूची वेबसाइट पर डालनी चाहिए। साथ ही  केंद्र सुनिश्चित करे  कि  कानून के तहत नियम और शर्तें पूरी की गई हैं। पीठ ने कहा इनका विज्ञापन भी जारी करना चाहिए।

इस दौरान  केंद्र सरकार की ओर से पेश ASG पिंकी आनंद ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि CIC के लिए चयन समिति ने उम्मीदवार का चयन कर लिया है। इसके लिए कुल 64 आवेदन प्राप्त हुए थे।हालांकि सूचना आयुक्तों का चयन अभी नहीं हुआ है।इन पदों के लिए 280 आवेदन प्राप्त हुए हैं और उन्हें शार्टलिस्ट किया जा रहा है।

इस दौरान सुप्रीम कोर्ट ने पश्चिम बंगाल सरकार  पर भी सवाल उठाए। पीठ ने पूछा कि कितने आरटीआई आवेदन दायर किए गए और कितने लंबित हैं। कितने समय से ये लंबित हैं ये 3 हफ्तों के भीतर स्टेटस रिपोर्ट दाखिल की जाए।

दरअसल पश्चिम बंगाल सरकार ने बताया कि कि राज्य में आरटीआई कम हो रही हैं। इस वक्त राज्य में 1 SIC और 2 सूचना आयुक्त हैं। सुप्रीम कोर्ट ने टिप्पणी करते हुए कहा कि  क्या इतना डर ​​है कि आवेदनों की संख्या में कमी आ गई ?

इस मामले में अगली सुनवाई जनवरी में होगी।

पिछली सुनवाई में  सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र और राज्यों से एक सप्ताह के भीतर सूचना आयोगों में रिक्तियों का विवरण दाखिल करने को कहा था।

सुप्रीम कोर्ट ने पूछा था कि इन रिक्तियों को भरने के लिए क्या कदम उठाए जा रहे हैं ? वहीं केंद्र ने सुप्रीम कोर्ट को बताया था कि वह आरटीआई अधिनियम में संशोधन कर रहा है।

दरअसल सुप्रीम कोर्ट  में आरटीआई एक्टिविस्ट  याचिकाकर्ता अंजली भारद्वाज ने केंद्र सरकार पर आरटीआई को खत्म करने की कोशिश करने  का आरोप लगाया है। याचिकाकर्ता की ओर से पेश वकील प्रशांत भूषण ने कहा कि सरकार नियुक्तियों को लेकर पारदर्शिता नहीं बरत रही है।