घर से दूर नौकरी लेने का मतलब ‘पति को छोड़ना’ नहीं है : छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट [आर्डर पढ़े]

छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने कहा है कि अगर पत्नी अपने ससुराल से दूर नौकरी करने का निर्णय करती है तो उसे अपना ससुराल छोड़ने का दोषी नहीं माना जाएगा।

न्यायमूर्ति गौतम भादुड़ी ने कहा की अगर पत्नी किसी अन्य सठान पर नौकरी करने का निर्णय करती है, तो उसे उसका पति या उसके पति के परिवार वाले ससुराल में अकेले रहने का दबाव नहीं डाल सकते।

वर्तमान मामले में एक व्यक्ति ने इस आधार पर तलाक़ की माँग की थी कि उसकी पत्नी नौकरी के कारण अपने घर से दूर रहती है। चूँकि फ़ैमिली अदालत ने उसकी याचिका ख़ारिज कर दी, वह यह मामला लेकर हाईकोर्ट पहुँच गया।

पत्नी पर कोई एकतरफ़ा निर्णय लादा नहीं जा सकता कोर्ट ने कहा कि पत्नी पर कोई एकतरफ़ा निर्णय यह कहते हुए नहीं थोपा जा सकता कि वह अपने पति और नौकरी में से किसी एक का चुनाव करे और उससे यह भी उम्मीद नहीं की जा सकती कि वह वैवाहिक बाध्यताओं में ही बाँधकर रहे।

जज ने कहा, “हिंदू समाज की सामान्य धारणा के अनुसार, पत्नी से उम्मीद की जाती है कि वह अपने पति के घर रहकर अपने वैवाहिक दायित्वों को पूरा करेगी…पर बदली परिस्थितियों में, जब लड़कियाँ शिक्षित हो रही हैं यह उम्मीद नहि की जानी चाहिए कि वह वैवाहिक दायित्वों को पूरा करने के लिए एक घर की सीमा में क़ैद रहेगी। यह पति और पत्नी पर है कि वे अपने वैवाहिक जीवन को किस तरह संतुलित करते हैं…एक ऐसे समय में जब नौकरियाँ मुश्किल से मिल रही हैं, किसी लड़की को सहायक प्राध्यापक की नौकरी मिलती है, तो उस पर किसी भी तरह का एकतरफ़ा निर्णय नहीं थोपा जा सकता कि उसे अपनी नौकरी और अपने पति में से किसी एक का चुनाव करना है। इसी तरह अगर कोई पत्नी काम करना शुरू करती है तो उसे जानबूझकर घर छोड़ना नहीं कहा जा सकता।”

उसे घर छोड़ने का दोषी नहीं माना जा सकता कोर्ट ने आगे कहा कि अगर पत्नी कहीं अन्य नौकरी करना चाहती है तो उसके पति के इशारे पर या उसके ससुराल वाले की ओर से उसे अपने पति के घर में ही रहने के लिए बाध्य नहीं किया जा सकता।

 

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