भीमा- कोरेगांव हिंसा : सुप्रीम कोर्ट ने महाराष्ट्र सरकार से पांच एक्टीविस्ट के खिलाफ दाखिल चार्जशीट मांगी

भीमा- कोरेगांव हिंसा : सुप्रीम कोर्ट ने महाराष्ट्र सरकार से पांच एक्टीविस्ट के खिलाफ दाखिल चार्जशीट मांगी

महाराष्ट्र के भीमा- कोरेगांव हिंसा मामले में सुप्रीम कोर्ट ने महाराष्ट्र सरकार को जून में गिरफ्तार पांच एक्टीविस्ट के खिलाफ दाखिल चार्जशीट को सुप्रीम कोर्ट में देने को कहा है।

चीफ जस्टिस रंजन गोगोई, जस्टिस संजय किशन कौल और जस्टिस के एम जोसेफ की पीठ ने सोमवार को कहा कि मराठी में दाखिल चार्जशीट को ट्रांसलेट कर सुप्रीम कोर्ट में दाखिल किया जाए। पीठ ने कहा कि वो आरोपों को देखना चाहते हैं।

वहीं महाराष्ट्र सरकार की ओर से पेश वरिष्ठ वकील मुकुल रोहतगी ने कहा कि 90 दिनों में चार्जशीट दाखिल ना करने पर तकनीकी तौर पर आरोपियों को जमानत नहीं मिलनी चाहिए क्योंकि उन पर गंभीर आरोप हैं।

वहीं आरोपी वकील सुरेंद्र गडलिंग की ओर से पेश वरिष्ठ वकील इंदिरा जयसिंह ने कहा कि उनके मुव्वकिल पर एक और FIR दर्ज कर दी गई है। ऐसे में अगर उन्हें जमानत मिलती है तो दूसरे मामले में गिरफ्तारी कर ली जाएगी।

पीठ ने उन्हें इस संबंध में आरोप संबंधी जानकारी दाखिल करने को कहा है। पीठ ने मामले को 11 दिसंबर के लिए सूचीबद्ध किया है।

इससे पहले 29 अक्तूबर को सुप्रीम कोर्ट ने बॉम्बे हाईकोर्ट के उस फैसले पर रोक लगा दी थी जिसमें पुलिस को चार्जशीट दाखिल करने के लिए 90 दिन के अतिरिक्त मोहलत के निचली अदालत के आदेश को रद्द कर दिया था। इससे आरोपियों को जमानत मिलने में मुश्किल होगी। इसी दौरान पुणे पुलिस ने चार्जशीट दाखिल कर दी थी।

 चीफ जस्टिस रंजन गोगोई, जस्टिस संजय किशन कौल और जस्टिस के एम जोसेफ की बेंच ने हाईकोर्ट के फैसले पर रोक लगाते हुए आरोपी सुरेंद्र गडलिंग को नोटिस जारी किया था।

इस दौरान महाराष्ट्र सरकार की ओर से पेश वरिष्ठ वकील मुकुल रोहतगी ने कहा था कि तकनीकी कारणों से चार्जशीट दाखिल नहीं हो पाई। पुलिस दस दिनों में चार्जशीट दाखिल करेगी। वहीं आरोपियों की ओर से पेश वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल ने इसका विरोध किया था।

महाराष्ट्र सरकार की ओर से निशांत कातनेश्वरकर के माध्यम से सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की गई थी। बॉम्बे हाईकोर्ट ने कोरेगांव-भीमा हिंसा मामले में गिरफ्तार वकील सुरेंद्र गडलिंग और अन्य आरोपियों के मामले में पुणे पुलिस को  चार्जशीट दाखिल करने के लिए 90 दिन अतिरिक्त देने के आदेश को रद्द कर दिया था। फैसले में जस्टिस मृदुला भाटकर ने कहा कि आरोप-पत्र दाखिल करने के लिए अतिरिक्त समय देना और गिरफ्तार लोगों की हिरासत अवधि बढ़ाने का निचली कोर्ट का आदेश गैरकानूनी है। हाईकोर्ट के इस आदेश से गडलिंग और अन्य सामाजिक कार्यकर्ताओं की जमानत पर रिहाई हो सकती थी लेकिन राज्य सरकार के अनुरोध पर जस्टिस भाटकर ने अपने आदेश पर रोक हुए इस पर सुप्रीम कोर्ट में अपील करने के लिए राज्य सरकार को एक नवंबर तक का समय दिया था था।

पुणे पुलिस ने गडलिंग  के अलावा प्रोफेसर शोमा सेन, दलित कार्यकर्ता सुधीर धवले, सामाजिक कार्यकर्ता महेश राउत और केरल की रोना विल्सन को भीमा- कोरेगांव में 31 दिसंबर 2017 और एक जनवरी 2018 को हुई हिंसा के मामले में 6 जून को गिरफ्तार किया था। इसके बाद पुणे पुलिस को सितंबर तक चार्जशीट दाखिल करनी थी लेकिन इसके बाद पुलिस ने पुणे स्पेशल कोर्ट में अर्जी दाखिल कर चार्जशीट दाखिल करने के लिए 90 दिनों का अतिरिक्त समय ले लिया था।