श्रमिक मुआवजा अधिनियम : सुप्रीम कोर्ट ने कहा, मुआवजा राशि पर ब्याज दुर्घटना की तारीख से देय होगा

सुप्रीम कोर्ट ने कहा है की कर्मचारी मुआवजा अधिनियम के तहत किसी कर्मचारी को मुआवजे के भुगतान पर ब्याज की अदायगी दुर्घटना की तारीख से होनी चाहिए।

कोर्ट ने यह फैसला एक नियोक्ता की याचिका पर दिया जिसने अपने एक कर्मचारी की मौत पर मुआवजे की राशि के भुगतान को चुनौती दी थी।

इस मामले मेंश्रमिक मुआवजा आयुक्त ने मुआवजे की राशि पर प्रति वर्ष 12% की दर से ब्याज देने को कहा था पर यह आदेश की तिथि की समाप्ति होने के 45 दिनों के बाद से दिया था और वह भी अगर नियोक्ता 45 दिनों के भीतर तय राशि को चुकाने में नाकाम रहता है तो।

न्यायमूर्ति अभय मनोहर सप्रे और न्यायमूर्ति इंदु मल्होत्रा की पीठ ने कहा कि प्रताप नारायण सिंह देव बनाम श्रीनिवास सबाता मामले में  सर्वोच्च न्यायालय की चार न्यायाधीशों की खंडपीठ ने कहा था कि व्यक्तिगत रूप से जिस दिन किसी को चोट पहुँचती है उसी दिन से मुआवजे के भुगतान का दायित्व उसके ऊपर आ जाता है न कि जिस दिन से दावे के भुगतान का आदेश दिया जाता है।

यह भी पाया गया कि सुप्रीम कोर्ट की एक खंडपीठ ने नेशनल इंश्योरेंश कंपनी लिमिटेड बनाम मुबासीर अहमद और ओरिएंटल इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड बनाम मोहम्मद नासीर और एनआर में उपरोक्त फैसले को ध्यान में रखे बिना कहा था कि मुआवजे का भुगतान आयुक्त के आदेश या उस तारीख से होगा जिस दिन मुआवजे के लिए आवेदन किया जाता है।

इसके बाद पीठ ने दावेदार के पक्ष में फैसला सुनाते हुए कहा कि मुआवजे की राशि पर दुर्घटना की तारीख से प्रति वर्ष 12% की दर से ब्याज देना होगा भले ही दावेदार ने मुआवजे की राशि को चुनौती दी है या नहीं।

 

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