सुप्रीम कोर्ट ने बिना नोटिस जारी किए कहा, राफेल सौदे में निर्णय लेने की प्रक्रिया का विवरण सीलबंद कवर में दिया जाए

अटॉर्नी जनरल केके वेणुगोपाल की कड़ी आपत्ति के बावजूद सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को केंद्र से ‘सीलबंद कवर’ में फ्रांस के 36 राफेल लड़ाकू विमानों की खरीद का निर्णय लेने की प्रक्रिया में उठाए गए कदमों का विवरण देने कहा है।

 हालांकि मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई, जस्टिस संजय किशन कौल और जस्टिस केएम जोसेफ की पीठ ने स्पष्ट किया कि मांगे गए ब्योरे में इस मामले की संवेदनशील प्रकृति को ध्यान में रखते हुए भारतीय वायुसेना के लिए उपकरणों की कीमत या उपयुक्तता शामिल नहीं होगी।

अटॉर्नी जनरल की आपत्तियों पर ध्यान देते हुए पीठ ने कहा कि वर्तमान चरण में केंद्र को कोई नोटिस जारी नहीं किया जा रहा है। आदेश में कहा गया कि वकील एम एल शर्मा और विनीत ढांडा द्वारा दायर जनहित याचिका में तथ्य

 अपर्याप्त प्रतीत होतें हैं इसलिए उनको ध्यान में नहीं रखा गया है और आदेश के पीछे उद्देश्य केवल निर्णय लेने की प्रक्रिया के बारे में अदालत को संतुष्ट करना है।

शुरुआत में अटॉर्नी जनरल ने पीठ से समझौते की SIT जांच की मांग करने वाली याचिकाओं पर सुनवाई ना करने का आग्रह किया। उन्होंने कहा, “यह राष्ट्रीय सुरक्षा का मामला है, संसद में 40 प्रश्न पूछे गए थे, जिन्हें आपके सामने रख दिया गया है। अगर नोटिस जारी किया गया तो यह प्रधान मंत्री के लिए होगा और इसी तरह … यह पारंपरिक अर्थ में एक पीआईएल नहीं है जहां कमजोर वर्गों के हितों की रक्षा की जानी चाहिए। “

एजी ने आगे कहा, “ये याचिका राजनीतिक प्रकृति की हैं जो विपक्षी और सत्ताधारी पार्टी के बीच लड़ाई के प्रकाश में राजनीतिक लाभ के लिए दायर की गई। यह न्यायिक रूप से समीक्षा योग्य मुद्दा नहीं है। न्यायालय अंतरराष्ट्रीय संधि में हस्तक्षेप नहीं करते,  घरेलू अदालत के लिए हस्तक्षेप करने का उचित नहीं होगा। “

सीजेआई ने एजी से कहा, “मान लीजिए कि हम सीलबंद कवर में निर्णय लेने की प्रक्रिया के ब्योरे के बारे में पूछते हैं, आप कैसे प्रतिक्रिया देंगे? इसमें राष्ट्रीय मानकों के संदर्भ में तकनीकी मानकों या उपयुक्तता को छूए बिना न्यायाधीशों द्वारा अनदेखा किया जाएगा?

एजी ने प्रतिक्रिया व्यक्त की “यह राष्ट्रीय सुरक्षा का मामला है। मुझे भी ये विवरण नहीं दिया जाएगा …. खरीद प्रोटोकॉल के लिए, इसे रक्षा प्रोक्योरमेंट प्रक्रिया कहा जाता है, जिसका वर्षों से पालन किया गया है। “

इन आपत्तियों को अलग रखते हुए अदालत ने 29 अक्टूबर तक विवरण मांगा और  31 अक्टूबर को आगे की सुनवाई के लिए मामले को सूचीबद्ध किया है।

वकील विनीत ढांडा द्वारा दायर पीआईएल में सर्वोच्च न्यायालय में एक सील कवर में यूपीए और एनडीए शासन के दौरान सौदा और तुलनात्मक कीमतों के ब्योरे का खुलासा करने के लिए केंद्र को एक निर्देश मांगा था।

वकील एम एल शर्मा की याचिका जो पहले दायर की गई में फ्रांस के साथ लड़ाकू जेट सौदे में विसंगतियों का आरोप लगाया। उन्होंने दावा किया कि 36 राफेल  जेट खरीदने के लिए  सरकारी समझौते को रद्द कर दिया जाना चाहिए क्योंकि यह “भ्रष्टाचार का नतीजा” था और अनुच्छेद 253 के तहत संसद द्वारा अनुमोदित नहीं किया गया था।

वहीं कांग्रेसी नेता तहसीन एस पूनावाल, जिन्होंने अपनी व्यक्तिगत क्षमता में एक समान याचिका दायर की थी, ने अपनी याचिका वापस ले ली।

आम आदमी पार्टी के राज्यसभा सदस्य संजय सिंह ने भी एक याचिका दाखिल की है जिसे सूचीबद्ध नहीं किया गया है।

Got Something To Say:

Your email address will not be published. Required fields are marked *


*