बॉम्बे हाईकोर्ट ने की कानून के छात्र की मदद, सीईटी से 22 वर्षीय छात्र को एलएलबी कोर्स में प्रवेश देने को कहा [निर्णय पढ़ें]

बॉम्बे हाईकोर्ट ने उच्चतर शिक्षा निदेशक, आम प्रवेश परीक्षा (सीईटी), महाराष्ट्र को निर्देश दिया है कि वह 22 वर्षीय उस छात्र को एलएलबी के तीन वर्षीय पाठ्यक्रम में प्रवेश दे जिसे पहले इससे मना कर दिया गया था। कोर्ट ने कहा कि प्रवेश नहीं देने का कोई ‘तर्कसंगत औचित्य’ नहीं था।

न्यायमूर्ति रंजीत मोरे और भारती डांगरे की पीठ ने 22 विवेक वेदक नामक छत्र को यह राहत दिलाई। वेदक को एलएलबी में अस्थाई प्रवेश की अनुमति दी गई थी पर उसके स्नातक के अंतिम वर्ष के परिणाम के आधार पर प्रवेश देने से मना कर दिया गया।

पृष्ठभूमि

वेदक ने 59.6 प्रतिशत अंक के साथ स्नातक की परीक्षा पास की। उसे सीईटी में 2069वां स्थान प्राप्त हुआ और उसे विद्या प्रसारक मण्डल, ठाणे म्यूनीसिपल काउंसिल लॉ कॉलेज में अस्थाई प्रवेश की अनुमति दी गई थी। उसे बाद में कॉलेज में प्रवेश नहीं दिया गया और उसे बताया गया की उसका मामला सीईटी और सीएपी के आयुक्त को सौंप दिया गया है। इसके बाद अपीलकर्ता आयुक्त की शरण में गया और उसे 18 सितंबर 2018 को बताया गया की वह तीन-वर्षीय एलएलबी में प्रवेश नहीं ले सकता क्योंकि वह पुराने पैटर्न का छात्र है जिसमें अंतिम वर्ष के प्राप्तांक के आधार पर क्लास दिये जाते हैं। अपीलकर्ता ने इस फैसले को चुनौती दी।

फैसला

कोर्ट ने कहा, “…सभी डिग्री परीक्षा को मिलाकर उम्मीदवार को प्रवेश के लिए 45% अंक की जरूरत होती है। नियम में यह नहीं कहा गया है कि उम्मीदवार नए पैटर्न का है या पुराने पैटर्न का…”।

कोर्ट ने कहा कि प्रवेश की अनुमति नहीं देना गलत था।

कोर्ट ने कहा कि इस छात्र ने अपने तीन साल के डिग्री कोर्स में कुल 59.41% अंक प्राप्त किया है और वह प्रवेश पाने के योग्य है।

कोर्ट ने अपीलकर्ता की अपील स्वीकार कर ली और सीईटी के आयुक्त को इस छात्र को प्रवेश देने को कहा।

 

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