गलत और भरमाने वाली स्थिति रिपोर्ट पेश करने वाले वरिष्ठ पुलिस अधिकारी के खिलाफ दिल्ली हाईकोर्ट ने अवमानना की कार्रवाई शुरू करने का आदेश दिया [आर्डर पढ़े]

गलत और भरमाने वाली स्थिति रिपोर्ट पेश करने वाले वरिष्ठ पुलिस अधिकारी के खिलाफ दिल्ली हाईकोर्ट ने अवमानना की कार्रवाई शुरू करने का आदेश दिया [आर्डर पढ़े]

दिल्ली हाईकोर्ट ने हाल ही में एक पुलिस अधिकारी के खिलाफ अवमानना की कार्रवाई शुरू करने का आदेश दिया जिसने कोर्ट में गलत और भरमाने वाली स्थिति रिपोर्ट पेश की।

 यह निर्देश न्यायमूर्ति मुक्ता गुप्ता ने जारी किया और कहा कि यह मामला 9 अक्तूबर को खंडपीठ के समक्ष सुनवाई के लिए अधिसूचित किया जाए।

 इस बारे में याचिका माला ने दायर किया था जिसने फेसबुक पर अपने और अपने समुदाय के खिलाफ लिखे गए अपमानजनक टिप्पणियों को हटाने की मांग की थी।

 इस मामले पर इंस्पेक्टर मनोज कुमार शर्मा, एसएचओ, मयूर विहार थाना, ने कोर्ट में 27 अगस्त को स्थिति रिपोर्ट पेश की। इस रिपोर्ट के अनुसार, टिप्पणियों को हटाने का आग्रह 16 अगस्त को किया गया था। रिपोर्ट के अनुसार, इसके बाद इन टिप्पणियों की जांच की गई और फेसबुक को साइबर प्रकोष्ठ के माध्यम से पत्र लिखकर टिप्पणियों को हटाने के लिए कहा गया।

 इस स्थिति रिपोर्ट के आधार पर कोर्ट ने राजी को निर्देश दिया कि वह इस बारे में रिपोर्ट पेश करे कि इन टिप्पणियों को हटाया गया या नहीं। इस बारे में दूसरा हलफनामा 14 सितंबर को दायर किया गया जिस पर उसी पुलिस अधिकारी का हस्ताक्षर था और उसने आश्वासन दिया कि टिप्पणियों को हटा दिया गया है।

 हालांकि, याचिकाकर्ता के वकील ने बताया कि पुलिस अधिकारी का बयान गलत है और जब कुछ शब्द लिखे जाते हैं तो यह पोस्ट दुबारा वापस आ जाता है। इसके बाद कोर्ट ने साइबर प्रकोष्ठ के प्रमुख को कोर्ट में पेश होने को कहा।

 साइबर प्रकोष्ठ के प्रमुख ने कहा कि टिप्पणियों को हटाने का प्रथम निर्देश उसे 12 सितंबर को प्राप्त हुआ और उसमें भी यूआरएल गलत दिया गया था। उसने कहा कि सही यूआरएल उसे 14 सितंबर को प्राप्त हुआ और उन्हें इसकी प्रक्रिया को पूरा करने में कम से कम दस दिन का वक़्त लगेगा।

 विसंगतियों के पाये जाने पर पुलिस अधिकारी से जवाब तलब किया गया। इस उसने कहा कि पहले हलफनामे में कुछ भाषा की गलतियाँ हो गई थीं और उसने इसके लिए माफी भी मांगी। उसने कहा कि साइबर सेल को इन टिप्पणियों को ब्लॉक करने के लिए उसने 25 अगस्त को ही कह दिया था और कहा था कि उन्हें याचिकाकर्ता का आग्रह शीघ्र ही भेज दिया जाएगा।

 कोर्ट ने गौर किया कि पुलिस इंस्पेक्टर ने अदालत से सूचना छिपायी थी और उसको गलत जानकारी दी। इसके बाद कोर्ट ने इस पुलिस अधिकारी के खिलाफ कोर्ट की अवमानना की प्रक्रिया शुरू करने का आदेश दिया।