सुप्रीम कोर्ट ने बाबरी मस्जिद गिराने की साजिश की सुनवाई से पूछा, तय वक्त पर ट्रायल पूरा कैसे करेंगे

सुप्रीम कोर्ट ने अयोध्या में 6 दिसंबर 1992 को बाबरी मस्जिद गिराने की साजिश के ट्रायल जज से पूछा है कि वो किस तरह ट्रायल को तय किए गए समय में पूरा करेंगे।

सोमवार को जस्टिस रोहिंटन एफ नरीमन और जस्टिस इंदु मल्होत्रा की पीठ ने सीबीआई जज एसके यादव से सीलबंद लिफाफे में जवाब दाखिल करने को कहा है। दरअसल सुप्रीम कोर्ट ने 19 अप्रैल 2017 में जारी आदेश में दो साल में ट्रायल पूरा करने को कहा था।

गौरतलब है कि लखनऊ की सीबीआई अदालत में BJP के वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी, मुरली मनोहर जोशी, और उमा भारती समेत 12 आरोपियों पर आपराधिक साजिश के तहत मुकदमा चल रहा है।

सीबीआई जज यादव ने सुप्रीम कोर्ट में अर्जी दाखिल कर इलाहाबाद हाईकोर्ट के उनकी पदोन्नति पर रोक के आदेश को चुनौती दी है। हाईकोर्ट ने उनकी पदोन्नति पर सुप्रीम कोर्ट के आदेश का हवाला देते हुए रोक लगाई है जिसमें कहा गया कि ट्रायल के दौरान जज का तबादला नहीं होगा।

जज यादव ने सुप्रीम कोर्ट में दाखिल याचिका में कहा है कि वो अब अपनी पदोन्नति चाहते हैं इसलिए सुप्रीम कोर्ट उन्हें इस केस से मुक्त करे। जज ने अभी तक हुई केस की प्रगति की जानकारी भी दी है। सुप्रीम कोर्ट ने इस अर्जी पर हाईकोर्ट के रजिस्ट्रार को नोटिस जारी कर जवाब भी मांगा है।

गौरतलब है कि 19 अप्रैल 2017 को अयोध्या में बाबरी गिराए जाने के मामले में दरअसल बीजेपी नेता लाल कृष्ण आडवाणी, मुरली मनोहर जोशी और उमा भारती समेत अन्य बीजेपी नेताओं के खिलाफ साजिश के मामले में  ट्रायल चलाने का निर्देश दिया था।

 सुप्रीम कोर्ट में सीबीआई ने अर्जी दाखिल की थी कि इन नेताओं के खिलाफ साजिश के आरोपों को बहाल किया जाए। सुप्रीम कोर्ट ने सीबीआई की अर्जी को स्वीकार कर लिया था। सुप्रीम कोर्ट ने राय बरेली और लखनऊ में चल रहे दोनों मामलों को एक साथ चलाने के निर्देश देते हुए लखनऊ ट्रांसफर कर दिया था। कोर्ट ने कहा कि रोजाना सुनवाई की जाए। साथ ही ये भी कहा था कि ट्रायल पूरा होने तक जज का तबादला ना हो। इस दौरान राज्यपाल होने की वजह से कल्याण सिंह को छूट दी गई।

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