गायों और अन्य आवारा पशुओं की सुरक्षा के लिए उत्तराखंड हाईकोर्ट ने विशेष दल का गठन करने, 24 घंटे पुलिस गश्त के निर्देश दिए [निर्णय पढ़ें]

उतराखंड हाईकोर्ट ने शुक्रवार को कुछ निर्देश जारी किए जो गायों और अन्य आवारा पशुओं की सुरक्षा से संबंधित हैं।

 न्यायमूर्ति राजीव शर्मा और न्यायमूर्ति मनोज कुमार तिवारी ने अलीम नामक एक व्यक्ति की याचिका पर सुनवाई करते हुए ये निर्देश जारी किये। इस व्यक्ति ने अपनी याचिका में आरोप लगाया था कि उसके क्षेत्र में गायों और अन्य पशुओं की हत्या की जा रही है। उसने दावा किया कि राज्य उत्तराखंड गाय संतति अधिनियम, 2007 के प्रावधानों, नगर निगम के क़ानून और पशु अत्याचार निवारण अधिनियम, 1960 के प्रावधानों  को लागू करने में विफल रहा है।

 कोर्ट ने इस याचिका की सीमा का विस्तार कर दिया है और कहा कि वर्तमान कानूनों के प्रावधानों को लागू करने में खामियां हैं और इसमें राज्य और आम नागरिक दोनों की ही गलती है।

 कोर्ट ने कहा, “हमें हर प्राणी के प्रति दया दिखानी चाहिए। पशु भले ही कुछ बोल न पाते हों पर एक समाज के रूप में हमें उनके लिए बोलना होगा। किसी भी पशु के खिलाफ कोई अत्याचार नहीं होना चाहिए। हिंदू मिथकों में हर पशु ईश्वर से संबंधित है। पशु भी हमारी तरह सांस लेते हैं और उनमें भी भावनाएं होती हैं। पशुओं को भी भोजन, पानी, आश्रय, सामान्य व्यवहार, चिकित्सा देखभाल…की जरूरत होती है।”

 निर्देश

 गायों और आवारा पशुओं की हत्या नहीं की जा सकती

  • उत्तराखंड में किसी भी गाय, बैल, सांड़, बछिया या बछड़े का अब कोई व्यक्ति वध नहीं करेगा या इनके वध में किसी भी तरह से कोई सहयोग नहीं देगा।
  • कोई व्यक्ति गाय, बैल, सांड़, बछिया या बछड़े को सीधे या किसी एजेंट या नौकर या इनकी ओर से काम करने वाले किसी अन्य व्यक्ति के माध्यम से इनको वध करने के लिए नहीं भेजेगा।
  • कोई व्यक्ति गोमांस या गोमांस से जुड़े उत्पादों की उत्तराखंड राज्य में कहीं भी बिक्री नहीं हो सकता है।

 आवारा जानवरों के मालिकों के खिलाफ कार्रवाई

  • अगर कोई पशु गलियों, सड़कों या सार्वजनिक स्थलों पर घूमता पाया जाता है तो उसके मालिकों के खिलाफ आईपीसी और विभिन्न पशु संरक्षण कानूनों के तहत कार्रवाई होगी।

सड़कों पर आवारा जानवर नहीं दिखने चाहिएं

  • उत्तराखंड के सभी राष्ट्रीय राजमार्गों राज्य राजमार्गों के मुख्य अभियंताओं को यह सुनिश्चित करने का निर्देश दिया जाता है कि कोई आवारा पशु सड़क पर आए।
  • नगर निगमों, निगम निकायों, नगर पंचायतों और ग्राम पंचायतों के प्रधानोंके कार्यपालक अधिकारियों को निर्देश दिया जाता है कि वे अपने अधिकार क्षेत्र से गुजरने वाली सड़कों को आवारा पशुओं से मुक्त रखेंगे और ट्रैफिक सुचारू चले यह सुनिश्चित करेंगे।
  • आवारा पशुओं को सड़कों से हटाये जाने के क्रम में इन पशुओं के साथ कोई क्रूरता नहीं होनी चाहिए। अगर इन पशुओं को किसी वाहन में ले जाया जा रहा है तो यह सुनिश्चित किया जाए कि इन वाहनों की गति 10-15 किलोमीटर प्रति घंटा से अधिक नहीं होनी चाहिए और रैंप बनाए जाने चाहिएं।

 डॉक्टर आवारा पशुओं का इलाज करेंगे

  • उत्तराखंड के सभी सरकारी पशु चिकित्सकों को निर्देश दिया जाता है कि वे आवारा पशुओं का इलाज करेंगे। अगर कोई आवारा पशु किसी तरह के चोट या बीमारी से ग्रस्त अहि तो नगर निगम निकाय, नगर पंचायत और सभी ग्राम पंचायत के अधिकारी यह सुनिश्चित करेंगे कि उनका उचित इलाज किया जाए।

गौशालाओं का निर्माण

  • सभी नगर निगम, निगम इकाई, जिला परिषद अपनेअपने क्षेत्रों में गौशालाओं और आवारा पशुओं के लिए आश्रय का निर्माण आज से एक साल के अंदर करेंगें।
  •  सभी जिलाधिकारियों को निर्देश दिया जाता है कि आज से एक साल के अंदर राज्य के सभी 25 जिलों में गौशाला/गौसदन का निर्माण किया जाएगा।

गायों की सुरक्षा के लिए विशेष दल

  • इस दल का नेतृत्व डीएसपी से कम रैंक का अधिकारी नहीं करेगा और कुमाऊँ और गढ़वाल में इस दल में एक एक पशु चिकित्सक भी होंगे।

 गौशाला पर कोई अतिक्रमण

  • आज से तीन माह के भीतर राज्य में सभी गौशालाओं को किसी भी तरह के अतिक्रमण से मुक्त करा लिया जाएगा।

गस्ती दल यह सुनिश्चित करेगा कि गायों का वध हो

  • उत्तराखंड के सभी जिला के सीओ को निर्देश दिया जाता है कि विशेषकर मैदानी इलाके के गांवों में दिन में एक बार गश्त की जाए ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि किसी गाय का वध किया जा सके।
  • सभी धर्मों के धर्म गुरुओं को गौशाला/गौसदन के निर्माण में सहयोग करने का निर्देश।
  • जब किसी पशु को कहीं ले जाया जाएगा तो उसके नाक, पैर या गर्दन को छोड़कर कोई और अंग बांधा नहीं जाएगा। अगर उनकी ढुलाई के क्रम में उनको बंधना जरूरी है तो फिर उनको ऐसीरस्सी से बांधा जाएगा जिसमें ऊपर गद्दे लगे हों।
  •  राज्य सरकार सभी जिलों में पशुओं के खिलाफ क्रूरता रोकने से संबंधित संस्था का गठन करेगी, अगर इसका गठन अभी तक नहीं हुआ है।
  •  किसी पिंजरापोल में अगर पशुओं को भेजा जाता है तो उसको भेजने पर आने वाला खर्च पशु का मालिक देगा।
  • अगर कोई व्यक्ति गाय के किसी बच्चे को आवारा छोड़ देता है तो राज्य सरकार उसके खिलाफ उस व्यक्ति के खिलाफ मामला दर्ज करेगा।

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