सुप्रीम कोर्ट ने उस महिला की सजा को सही ठहराया जिसके “वेश्या” कहने पर एक युवती ने आत्महत्या कर ली थी [आर्डर पढ़े]

मृत युवती की उम्र 26 साल थी और अविवाहित होने के कारण वह इस तरह के ताने से दुखी थी जिसके बाद उसने शरीर को आग लगाकर आत्महत्या कर ली।”

शब्दों का प्रयोग बहुत ही सावधानीपूर्वक किया जाना चाहिए नहीं तो यह घातक बन सकता है और किसी की जान तक ले सकता है। यह मामला (रानी @सहयारनी बनाम तमिलनाडु राज्य ) ऐसा ही था जिसमें एक युवती को किसी का ताना इतना बुरा लगा कि उसने ग्लानि के मारे खुदकुशी कर ली।

सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में उस महिला को दोषी ठहराए जाने के फैसले को सही बताया जिसके वेश्या कहने पर इस युवती ने ख़ुदकुशी कर ली थी।

वर्ष 1998 की शुरुआत में एक युवती ने खुद को आग लगाकर आत्महत्या कर ली। मरने से ठीक पहले दिए अपने बयान में उसने बताया  था कि एक महिला ने उसे गालियाँ दीं और उसे वेश्या कहा।

निचली अदालत ने इस महिला को आईपीसी की धारा 306 के तहत दोषी माना और उसे तीन साल की कैद की सजा सुनाई। हाईकोर्ट ने भी उसको दोषी माना पर उसकी सजा को घटाकर एक साल कर दिया।

इन आदेशों के खिलाफ दायर अपील की सुनवाई सुप्रीम कोर्ट की न्यायमूर्ति आर बनुमती और न्यायमूर्ति विनीत सरन की पीठ ने की और इस महिला को दोषी माना। पीठ ने कहा, “…मृतक युवती मात्र 26 साल की थी और अविवाहित होने के कारण इस गाली से वो दुखी और चिंतित थी जिसकी परिणति अपने शरीर में आग लगाकर खुदकुशी में हुई।”

पीठ ने आरोपी से कहा कि वह अपनी शेष सजा काटने के लिए चार सप्ताह के भीतर खुद को प्रस्तुत करे।

 

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