सुप्रीम कोर्ट ने आदेश नहीं मानने और माफी नहीं मांगने वाले व्यक्ति को तीन महीने के लिए अदालत से सीधे जेल भेजा [आर्डर पढ़े]

सुप्रीम कोर्ट ने आदेश नहीं मानने और माफी नहीं मांगने वाले व्यक्ति को तीन महीने के लिए अदालत से सीधे जेल भेजा [आर्डर पढ़े]

सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को माफी नहीं मांगने वाले मुकदमादार को अदालत से तीन महीने के लिए सीधे जेल भेज दिया।

कोर्ट द्वारा 2004 में आयोजित नीलामी में कोविलकर लक्ष्मोजी राव की संपत्ति वारा कुमारी ने खरीदी । इसके बाद राव ने दीवाल बनाकर इस परिसंपत्ति तक पहुँचने का रास्ता बंद कर दिया। इस संपत्ति को खरीदने वाली वारा कुमारी ने इसके बाद इस दीवाल को गिराए जाने की मांग की जिसकी अनुमति उसे दे दी गई।

हाईकोर्ट में दायर एक पुनरीक्षण याचिका में हाईकोर्ट ने पूर्व में निचली अदालत द्वारा दिए गए फैसले को यह कहते हुए निरस्त कर दिया कि इस संपत्ति की खरीददार ने नीलामी में कोई सुविधाधिकार नहीं खरीदा था इसलिए उसे अपनी ही परिसंपत्ति तक जाने का कोई अधिकार नहीं है।

हाईकोर्ट के इस आदेश के खिलाफ दायर अपील में सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट के आदेश को खारिज कर दिया और कहा कि सुविधाधिकार खरीदने की कोई जरूरत नहीं है और इस परिसंपत्ति तक पहुँचने का अधिकार नीलामी के दिन उपलब्ध था और इसके बाद इसको अवरुद्ध कर दिया गया। यह 2015 में हुआ।

इसके बाद चूंकि राव इस स्थिति को स्वीकार करने के लिए तैयार नहीं था, सो उसके खिलाफ अवमानना का एक मामला दर्ज किया गया और सुप्रीम कोर्ट ने उसके खिलाफ गैरजमानती वारंट जारी किया।

अंततः, बुधवार को वह सुप्रीम कोर्ट में न्यायमूर्ति रोहिंटन फली नरीमन और न्यायमूर्ति इंदु मल्होत्रा के समक्ष पेश हुआ पर उसने न तो अपने गलत व्यवहार के लिए माफी मांगी न ही उसने यह आश्वासन दिया कि वह इस आदेश को मानेगा।

पीठ ने इसके बाद अपने आदेश में कहा, “प्रतिवादी इस कोर्ट के समक्ष इसलिए पेश हुआ क्योंकि उसके खिलाफ गैर जमानती वारंट जारी हुआ था...वह आदेश को मानने से लगातार बचता रहा है। वह अपने व्यवहार के लिए खेद नहीं व्यक्त किया है न ही उसने इस बात का आश्वासन दिया है कि वह आदेश का पालन करेगा। इसकी वजह से उसे इस अदालत से तीन महीने के लिए सीधे जेल भेजा जाएगा। इस बीच वह 8 जनवरी 2015 को जारी आदेश का पालन भी करेगा। अगर ऐसा नहीं किया गया तो उसकी जेल की सजा तीन महीने के लिए और बढ़ा दी जाएगी। विजयवाड़ा के पुलिस कमिश्नर को निर्देश दिया जाता है कि वह आज से चार सप्ताह के भीतर उसके आदेश के पालन से संबंधित रिपोर्ट कोर्ट में पेश करेगा।”