सुनंदा पुष्कर मामला : थरूर के खिलाफ केस स्पेशल फास्ट ट्रैक कोर्ट में ट्रांसफर, 28 मई को सुनवाई

सुनंदा पुष्कर मामला : थरूर के खिलाफ केस स्पेशल फास्ट ट्रैक कोर्ट में ट्रांसफर, 28 मई को सुनवाई

कांग्रेसी नेता शशि थरूर की पत्नी सुनंदा पुष्कर की मौत के मामले को पटियाला हाउस कोर्ट में सासंद, विधायकों के लिए बनी स्पेशल फास्ट ट्रैक कोर्ट को भेज दिया गया है। स्पेशल कोर्ट अब 28 मई को मामले की सुनवाई करेगी।

पटियाला हाउस कोर्ट में गुरुवार को मेट्रोपॉलिटन मजिस्ट्रेट धर्मेंद्र कुमार ने केस को एडिशनल चीफ मेट्रोपॉलिटन मजिस्ट्रेट समर विशाल की स्पेशल कोर्ट में ट्रांसफर करते हुए कहा कि 28 मई को इसकी सुनवाई होगी। थरूर वर्तमान में केरल से सांसद हैं।

गौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट के आदेशों के अनुसार पटियाला हाउस कोर्ट में सासंदों व विधायकों के लंबित केसों के ट्रायल के लिए दो स्पेशल फास्ट ट्रैक कोर्ट बनाई गई हैं।

कांग्रेसी नेता शशि थरूर की पत्नी सुनंदा पुष्कर की मौत के मामले में दिल्ली पुलिस की एसआइटी ने 14 मई  को पटियाला हाउस कोर्ट में चार्जशीट दायर की थी। एसआइटी ने आत्महत्या के लिए उकसाने के लिए IPC की धारा 306 और दहेज प्रताड़ना के लिए IPC की धारा 498A के तहत चार्जशीट दायर की.

करीब 3000 पेज की चार्जशीट में एसआइटी ने पूर्व केंद्रीय मंत्री व कांग्रेस के वरिष्ठ नेता शशि थरूर को मुख्य संदिग्ध आरोपी माना है।सुनंदा की मौत मामले में अज्ञात के खिलाफ हत्या की धारा में केस दर्ज किया गया था  लेकिन जांच में एसआइटी को हत्या के सुबूत नहीं मिले। एसआइटी को जो सुबूत मिले हैं  उसके अनुसार सुनंदा को काफी प्रताड़ित किया जाता था और उनकी पिटाई की जाती थी। एसआइटी का मानना है कि थरूर की प्रताड़ना से तंग आकर सुनंदा ने खुदकशी की थी।

एसआइटी के मुताबिक आइपीसी की धारा 306 (आत्महत्या के लिए उकसाने) चार्जशीट में इसलिए शामिल की गई है क्योंकि सुनंदा के शरीर पर चोट के 12 निशान मिले थे। इससे साफ पता चलता है कि थरूर ने सुनंदा के साथ मारपीट की थी। वहीं धारा 498 ए इसलिए लगाई गई है, क्योंकि थरूर व सुनंदा का वैवाहिक जीवन काफी तनावपूर्ण था।

 17 जनवरी 2014 को चाणक्यपुरी स्थित पांच सितारा होटल लीला पैलेस के सुइट नंबर 345 में संदिग्ध परिस्थितियों में सुनंदा की मौत हो गई थी। इससे एक दिन पहले उनके और पाकिस्तानी पत्रकार मेहर तरार के बीच ट्विटर पर कथित बहस हुई थी। यह बहस शशि थरूर के साथ मेहर की बढ़ती नजदीकियों को लेकर हुई थी।

29 सितंबर 2014 को एम्स के मेडिकल बोर्ड ने सुनंदा के शव की पोस्टमार्टम रिपोर्ट दिल्ली पुलिस को सौंपी थी। इसमें कहा गया था कि उनकी मौत जहर से हुई है। बोर्ड ने कहा था कि कई ऐसे रसायन हैं जो पेट में जाने या खून में मिलने के बाद जहर बन जाते हैं। लिहाजा बाद में उनके वास्तविक रूप के बारे में पता लगाना बहुत मुश्किल होता है।

पोस्टमार्टम रिपोर्ट के बाद एक जनवरी 2015 को अज्ञात के खिलाफ हत्या की धारा में मुकदमा दर्ज कर लिया गया था। इसके बाद पुलिस ने सुनंदा के विसरा को जांच के लिए अमेरिका की शीर्ष जांच एजेंसी की एफबीआई की लैब भेजा था लेकिन वहां भी जहर के बारे में पता नहीं लग सका था। सुनंदा की मौत के मामले में दिल्ली पुलिस थरूर के घरेलू सहायक नारायण सिंह, चालक बजरंगी और दोस्त संजय दीवान का पॉलीग्राफ टेस्ट भी करवा चुकी है।