सुप्रीम कोर्ट ने 2008 में आयोजित पंजाब वरिष्ठ न्यायिक सेवा परीक्षा को दी गई चुनौती खारिज की [निर्णय पढ़ें]

सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को पंजाब वरिष्ठ न्यायिक सेवा की परीक्षा को दी गई चुनौती को खारिज कर दिया। इस परीक्षा का आयोजन 2008 में हुआ था। चुनौती इस आधार पर दी गई थी कि एक जज को प्रोमोशन देने के कारण जो पद खाली हुआ था उसको भर्ती के लिए दिए गए विज्ञापन के बाद भर्ती में शामिल नहीं किया जा सकता।

शीर्ष अदालत ने कहा कि विज्ञापन को सिर्फ इसलिए दोषपूर्ण नहीं कहा जा सकता क्योंकि उस समय जितने पद खाली थे सबको विज्ञापन में स्थान नहीं मिला।

न्यायमूर्ति जे चेलामेश्वर और न्यायमूर्ति संजय किशन कौल ने पांच वकीलों द्वारा दायर इस याचिका को खारिज कर दिया। इन वकीलों ने 2008 में यह परीक्षा दी थी पर वे इसमें सफल नहीं हुए थे।

पंजाब वरिष्ठ न्यायिक सेवा नियम के नियम 7 के तहत पंजाब सिविल सर्विसेज (न्यायिक शाखा) और योग्य एडवोकेट दोनों से ही नियुक्त की जानी थी और यह नियुक्ति लिखित परीक्षा और साक्षात्कार से होनी थी। कुल पदों में से 25 प्रतिशत की नियुक्ति सीधे होनी थी।

जो अपील दाखिल की गई थी वह सीधी नियुक्ति की प्रक्रिया से संबंधित थी और इसके लिए 2 फरवरी 2008 विज्ञापन जारी हुआ था।

21 उम्मीदवारों की नियुक्ति के लिए आवेदन आमंत्रित किये गए जिनमें 10 सामान्य श्रेणी के, छह अनुसूचित जाति के, दो पिछड़े वर्ग के, एक एक्स सर्विसमैन (सामान्य श्रेणी), एक पिछड़ा वर्ग के (एक्स सर्विसमैन) और एक दिव्यांग श्रेणी के शामिल थे।

अपील दायर करने वाले सभी लोग सामान्य श्रेणी के हैं जो इस परीक्षा की मेरिट सूची में नहीं आ पाए।

कोर्ट ने विभिन्न पक्षों की दलील सुनने के बाद कहा, “…हमारे विचार से बाद में जो पद खाली हुआ उसको इसमें शामिल नहीं किया जा सकता था न ही हाईकोर्ट के लिए यह बाध्यता थी कि वह नियुक्त किये जाने वाले लोगों की संख्या को बढ़ा दे…”

कोर्ट ने याचिका में एक्स सर्विसमैन के लिए दो पदों पर आपत्ति किये जाने पर कहा कि याचिकाकर्ताओं में से एक व्यक्ति ने तीन बार इस परीक्षा में बैठा पर वह पास नहीं हो पाया। कोर्ट ने यह भी कहा कि पहले जो एक पद एक्स सर्विसमैन के लिए आरक्षित था उसको फ़ास्ट ट्रैक अदालत के के जज को पदोन्नति देकर भर दिया गया।

पीठ ने कहा, “सिर्फ यही नहीं कि शुरुआती भर्ती के इस मामले के 10 साल हो गए हैं, आवेदनकर्ताओं को इस विलंब के लिए जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता, पर अब यह संभव नहीं है कि समय को पीछे किया जाए।

कोर्ट ने कहा, “…गुरमीत पाल सिंह इसलिए प्रभावित हुआ क्योंकि एससी श्रेणी का एक ज्यादा मेरिट वाले व्यक्ति को योग्य पाया गया जिसकी वजह से वह एक श्रेणी नीचे चला गया। पर यह एक स्थापित कानूनी स्थिति है कि जब आरक्षित श्रेणी का कोई उम्मीदवार अपनी योग्यता के कारण खुली प्रतियोगिता से चुना जाता है तो उसको सामान्य श्रेणी में शामिल किये जाने का अधिकार है और यह कि उसे आरक्षित श्रेणी में नहीं डाला जाए।”

 

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