CLAT 2018 की परीक्षा की रिपोर्ट : इसमें सब कुछ हुआ – तकनीकी गड़बड़ी, परीक्षा देर से शुरू हुई, छात्रों का 10-15 मिनट बर्बाद हुआ

कॉमन लॉ एडमिशन टेस्ट (CLAT), 2018 में एक बार फिर बहुत सारी गड़बड़ियाँ हुईं और इस तरह इस परीक्षा ने इस मायने में अपनी पूर्व प्रतिष्ठा बनाए रखी।

लगभग सभी छात्र जिनसे लाइव लॉ ने संपर्क किया, परीक्षा के दौरान तकनीकी गड़बड़ी होने की बात बताई और कहा कि इस वजह उनके 10-15 मिनट बर्बाद हुए।

परीक्षा से एक महीना पहले शुरू हुए नए ऑनलाइन इंटरफ़ेस के बारे में छात्रों ने कहा कि यह बिल्कुल ही छात्रों के मुफीद नहीं था। और तिस पर बड़े पैमाने पर हुए कुप्रबंध के कारण छात्रों ने तो यह परीक्षा दुबारा लिए जाने की मांग तक कर डाली।

जयपुर में दीपंकर शर्मा और ज्ञान बिस्सा के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई जा चुकी है। इनमें से एक एनएलयू जोधपुर में सहायक प्राध्यापक हैं। इन पर कुछ छात्रों को 40 मिनट तक का अतिरिक्त समय देने का आरोप है। अब तक इस बारे में चार छात्रों का बयान रिकॉर्ड किया जा चुका है।

इस साल इस परीक्षा में हुई गड़बड़ी के बाद अब सुप्रीम कोर्ट को प्रो. बशीर की याचिका पर जरूर कुछ कठोर कदम उठाना चाहिए। बशीर की याचिका पर 15 मई को सुनवाई होगी।

हिसार, हरियाणा

सूत्रों की मानें, तो छात्र हिसार में 8 बजे शाम तक परीक्षा देते रहे। तकनीकी गड़बड़ियों की वजह से कई छात्रों को दो या तीन बार परीक्षा के लिए कोशिश करनी पड़ी। केंद्र पर छात्र, उनके परिजन, बीसीआई अधिकारी, और मीडिया का जमावड़ा था।

मुलुंड, मुंबई

एक छात्र ने कहा, तकनीकी गड़बड़ी के कारण उसका लगभग 10 मिनट बर्बाद हुआ। उसने भी नए इंटरफ़ेस के छात्रों के अनुकूल नहीं होने की बात कही। पूरा इंटरफ़ेस ऐसा था कि उसमें क्या है उसको समझना मुश्किल था जबकि प्रशासन का कहना था कि यह बहुत सुधरा हुआ है। सर्वर बंद होते रहे। और बार बार यही सब बातें दुहराई जाती रहीं। सीएलएटी की प्रतिष्ठा के बिल्कुल विपरीत था। मैंने अपना बहुमूल्य 10 मिनट गंवाया।

उसे कहा गया कि उसे उसको एक्स्ट्रा टाइम दिया जाएगा पर बाद में उसे इनविजिलेटर ने कहा वह ऐसा नहीं कर सकता। जिस परीक्षा को 5 बजे समाप्त होना चाहिए वह 6 बजे के बाद समाप्त हुआ। अपने खोये हुए 10 मिनट में मैं 7 अंक और प्राप्त कर सकता था।  मुझे लग रहा है कि इस मामले को गंभीरता से लेना चाहिए।

दाविन इन्फोटेक, ठाणे

यहाँ एक छात्र ने बताया कि उसको तो पीसी ही बदलवाना पड़ा। उसको जो पीसी दिया गया था वह बायोमेट्रिक पंजीकरण के लिए प्रयोग होता था। परीक्षा केंद्र पर पर्याप्त पीसी उपलब्ध नहीं था। सपोर्ट स्टाफ कतई मददगार नहीं थे। स्क्रीन पर प्रश्न दिखाई नहीं देता था। मेरा पीसी बार बार बंद होता रहा।

गाज़ियाबाद

एक छात्रा ने अपने फेसबुक वाल पर लिखा था –

“…हमें परीक्षा में अपनी घड़ी नहीं ले जाने दिया गया सो टाइम के बारे में हमें कुछ पता नहीं चल रहा था। वहाँ मौजूद इनविजिलेटरों को यह भी पता नहीं था कि हमारा डेमो एग्जाम 2.30 दोपहर शुरू होना है…फिर पता करने के बाद हमें लॉग इन करने को कहा गया।

…जब हमने अपना टेस्ट शुरू किया, स्क्रीन पर हमें अपना ही फोटो दिखाई नहीं दे रहा था…ऐसा बहुत छात्रों के साथ हो रहा था ….गणित के 9 प्रश्न हमें एकदम दिखाई नहीं दे रहे थे। प्रश्न की जगह खाली दिख रहे थे…कुछ प्रश्नों में विकल्प नहीं दिख रहे थे…हमने शिकायत की पर हमें कहा गया इसे शीघ्र दुरुस्त किया जाएगा…

टाइमर कह रहा था परीक्षा ख़त्म होने में 26 मिनट बाकी है पर इनविजलेटर ने हमें बताया कि हमारा टाइम ख़तम हो गया है और आपत्ति करने पर उसने हमें अपने मोबाइल का टाइम दिखाया…हमें परीक्षा हॉल से निकल जाने को कहा गया।

मैंने “सबमिट” पर क्लिक किया पर मुझे कहा गया कि अभी 23 मिनट बाकी है, आप ऐसा नहीं कर सकते। मुझे बताया गया कि आप हॉल से जाइए यह खुद ही “सबमिट” हो जाएगा।

काशी इंस्टीच्यूट ऑफ़ टेक्नोलॉजी, वाराणसी

एक छात्र के फेसबुक वाल से –

“यह एक घोटाला है जिसे आप # #23crorescam कह सकते हैं क्योंकि एनएलयू कोच्ची ने हमारे फीस से 23 करोड़ कमाया है।

…मैं पहले प्रश्न के उत्तर पर क्लिक नहीं कर पा रहा था…किसी अन्य प्रश्न पर भी नहीं जा पा रहा था…इसमें मेरा 10 मिनट चला गया…मैं चिल्लाया कि मेरा समय बर्बाद हो रहा है…फिर मुझे दूसरा पीसी दिया गया…यहाँ भी वही मामला…मैंने पांच कंप्यूटर पर अपना एग्जाम पूरा किया…

हॉल में छात्र एक-दूसरे से खुलेआम बात कर रहे थे…मेरा पांच मिनट बर्बाद हुआ…मेरा पेपर सबमिट नहीं हुआ क्योंकि समय पूरा होने के समय मेरा सिस्टम हैंग हो गया…मुझे कहा गया आप जाइए सबमिट हो जाएगा…शिकायत रजिस्टर माँगने पर उन्होंने कहा जाइए और सीएलएटी से शिकायत कीजिए…यहाँ ऐसा कोई रजिस्टर नहीं है।

ज्ञान गंगा एजुकेशन ट्रस्ट इंटरनेशनल स्कूल, ठाणे

“हम जहाँ एग्जाम दे रहे थे वह एक निर्माणाधीन भवन था जिसमें कोई सुविधा नहीं थी…शौचालय भी नहीं…तकनीकी खराबी आम थी…हम 20 मिनट देरी से लॉग इन कर पाए। यह एग्जाम बदइंतजामी का सबसे खराब नमूना था।”

ठाणे के अन्य केंद्रों का हाल  

…पेपर शुरू करने पर स्क्रीन पर टेक्स्ट समझ में नहीं आ रहा था…एक इनविजलेटर को मानिने फोन पर प्रश्नों के बारे में बात करते सुना…दो घंटे में उसके पास चार-पांच फोन आए…पेपर सबमिट करने में 10-15 मिनट का अंतर था।

…हमें स्क्रीन पर क्या लिखा है कुछ नहीं समझ में आ रहा था…हमने देर से शुरू किया पर हमें अतिरिक्त समय नहीं मिला और पेपर खुद ‘सबमिट’ हो गया। फिर 10 मिनट के बाद हमें दुबारा लॉग इन करने को कहा गया और सबको एक्स्ट्रा टाइम दिया गया…पर कुछ छात्रों को कोई मुश्किल नहीं पेश आई।

(इस आलेख के लिए सुश्री इरा गोसावी ने बहुमूल्य सूचना उपलब्ध कराई है)

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