तमिलनाडु का गुटखा घोटाला : मद्रास हाईकोर्ट के CBI जांच के आदेश के खिलाफ याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुरक्षित रखा

तमिलनाडु का गुटखा घोटाला : मद्रास हाईकोर्ट के CBI जांच के आदेश के खिलाफ याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुरक्षित रखा

सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को मद्रास उच्च न्यायालय के फैसले के खिलाफ राज्य सतर्कता विभाग से मामले को सीबीआई में स्थानांतरित करने के फैसले के खिलाफ एक आरोपी द्वारा दाखिल याचिका पर फैसला सुरक्षित रख लिया है।

आरोपी की ओर से पेश वरिष्ठ वकील मुकुल रोहतगी ने मुख्य न्यायाधीश दीपक मिश्रा की अगुवाई वाली पीठ के समक्ष तर्क दिया कि 26 अप्रैल को मद्रास उच्च न्यायालय के मामले को सीबीआई को हस्तांतरित करने के फैसले से पहली समन्वय बेंच के आदेश का उल्लंघन हुआ है, जिसने निष्कर्ष निकाला था कि मामले में सीबीआई की जांच जरूरत नहीं है।

राज्य स्वास्थ्य विभाग के एक अधिकारी और आरोपी याचिकाकर्ता ई शिवकुमार के लिए उपस्थित रोहतगी ने तर्क दिया कि जांच को सीबीआई को स्थानांतरित करने से पहले उनके मुव्वकिल को सुनवाई का मौका नहीं दिया गया था।

रोहतगी ने तर्क दिया कि उच्च न्यायालय में दायर याचिकाएं "राजनीतिक प्रतिद्वंद्वी" द्रमुक के विधायक जे अंबाज़गन और कार्यकर्ता 'ट्रैफिक रामास्वामी' के इशारे पर थीं।

अपने जवाब में याचिकाकर्ताओं के लिए वरिष्ठ वकील पी विल्सन ने अदालत से एक पल के लिए रुकने को कहा कि कैसे "स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी को सर्वोच्च न्यायालय में पूर्व अटॉर्नी जनरल की सेवाएं मिल सकती हैं?"

विल्सन ने तर्क दिया कि "एक अभियुक्त ये नहीं कह सकता कि जांच किसे करनी चाहिए।” उन्होंने कहा कि तमिलनाडु में अवैध गुटखा व्यापार 30,000 करोड़ रुपये से अधिक है।

विल्सन ने प्रस्तुत किया, "गुटखा  कैंसरजन्य और चबाने योग्य सामान है जिसे तमिलनाडु में प्रतिबंधित किया गया है। लेकिन ये आसानी से बेचा जाता है।"

शिवकुमार ने कहा कि उच्च न्यायालय ने आदेश पारित किया था जब सतर्कता और भ्रष्टाचार विरोधी आयोग (डीवीएसी) द्वारा गुटखा अन्य तम्बाकू उत्पादों पर प्रतिबंध के उल्लंघन के आरोपों से संबंधित जांच शुरू हो चुकी है और वह एडवांस स्टेज पर है।

 याचिकाकर्ता आरोपी ने कहा कि उच्च न्यायालय ने याचिकाकर्ता जो सरकारी अधिकारी हैं और जो जांच के साथ पहले ही सह-संचालन कर रहे हैं,जैसे व्यक्तियों की दुर्दशा पर विचार किए बिना विपक्षी विधायक द्वारा दायर याचिका के आधार पर सीबीआई को मामले के हस्तांतरण के आदेश को पारित किया।

याचिका में दलील दी गई कि जांच के ट्रांसफर आदेश किसी भी आरोपी व्यक्ति को प्रश्न पर सुनवाई के बिना और जांच की स्थिति को देखे बिना दिया गया था। उच्च न्यायालय भी इस बात पर असफल रहा कि "डीवीएसी द्वारा वर्तमान जांच उच्च न्यायालय के आदेश के अनुसार किसी अन्य मामले में है।"

तमिलनाडु में अवैध गुटखा व्यापार में कथित तौर पर मंत्रियों और पुलिस महानिदेशक टीके राजेंद्रन शामिल हैं। मद्रास उच्च न्यायालय की मुख्य न्यायाधीश इंदिरा बनर्जी और न्यायमूर्ति अब्दुल कुधोज की  डिवीजन बेंच ने 26 अप्रैल के आदेश को पारित किया था।

आदेश के दौरान न्यायाधीशों ने कहा था, "भूमिगत गुटखा व्यवसाय समाज के खिलाफ एक अपराध है और इसलिए हम इस मुद्दे को सीबीआई जांच के आदेश के लिए उपयुक्त मानते हैं।" न्यायाधीशों ने यह स्पष्ट कर दिया था कि उनके द्वारा आदेशित सीबीआई जांच को कथित व्यवसाय में शामिल किसी भी व्यक्ति की जटिलता के संबंध में एक निश्चित निष्कर्ष के रूप में नहीं माना जाना चाहिए और यह सत्य की खोज करने के लिए जांच एजेंसी पर निर्भर है।  गुटखा निर्माण और बिक्री के लिए मंत्रियों और कुछ शीर्ष पुलिस अधिकारियों के लिए भारी रिश्वत के कथित भुगतान से संबंधित मुद्दा उठाया गया जिसके बाद आयकर विभाग द्वारा गुटखा के व्यापार परिसर में किए गए छापों में राज्य में प्रतिबंधित पदार्थ बरामद किए गए थे।