साक्ष्य अधिनियम की धारा 27 केवल तभी लागू हो सकती है यदि इकबालिया बयानों से कुछ नया तथ्य सामने आए : सुप्रीम कोर्ट [निर्णय पढ़ें]

साक्ष्य अधिनियम की धारा 27 केवल तभी लागू हो सकती है यदि इकबालिया बयानों से कुछ नया तथ्य सामने आए : सुप्रीम कोर्ट [निर्णय पढ़ें]

पुलिस का ये दावा कि आरोपी से ये चीजें बरामद की गई हैं, हो सकता है कि इन्हें पुलिस ने ही प्लांट किया हो,  बेंच ने कहा। 

सुप्रीम कोर्ट ने नवनीतकृष्णन बनाम पुलिस निरीक्षक द्वारा राज्य मामले में तय कानूनी बिंदू  को दोहराया है कि साक्ष्य अधिनियम की धारा 27 केवल तभी लागू होती है जब इकबालिया बयान के चलते कोई नया तथ्य सामने आता है। इसकी के साथ कोर्ट ने हत्या के मामले में सजा को रद्द कर दिया।

दरअसल तीन लोगों को जॉन बोस्को और माधन का अपहरण करने का आरोप लगाया गया और कहा गया कि तीनों ने एक रस्सी का उपयोग करके एक एक करके दोनों को गला घोंटकर मार दिया गया था। इसके बाद मृत शरीर को बोरी में भरकर पानी में डूबा दिया था। उच्च न्यायालय ने सभी अभियुक्तों को दोषी ठहराने के ट्रायल कोर्ट के फैसले को बरकरार रखा।

 सुप्रीम कोर्ट में अपीलकर्ता ने इस आधार पर  फैसले को चुनौती दी थी कि यह केवल परिस्थितिजन्य साक्ष्यों के आधार पर है और आखिरी बार देखे जाने के सिद्धांत पर आधारित है।

 न्यायमूर्ति एके सीकरी और न्यायमूर्ति आरके अग्रवाल की पीठ ने 'अंतिम बार देखे जाने के सिद्धांत' के संबंध में कहा कि हालांकि अंतिम बार देखे जाने का सिद्धांत परिस्थितियों की श्रृंखला में एक महत्वपूर्ण घटना है, जो पूरी तरह से स्थापित करने और / या  अपराध की ओर इशारा कर सकता है।लेकिन इसी सबूत के आधार पर आरोपी पर अपराध को उचित संदेह से परे स्थापित करने के बोझ को नहीं छोड़ सकते और इसकी पुष्टि की आवश्यकता है।

पीठ ने यह भी कहा कि अपराध और बरामद चीजों के  बीच किसी भी लिंक के अभाव में आरोपी की निशानदेही पर बरामद चीजों का  मामले के तथ्यों पर कोई असर नहीं होगा।

 यह कहा गया: " इस मामले में यशिका कैमरा, जो अभियुक्त नंबर 3 की निशानदेही से बरामद किया गया था, पिता के साथ-साथ मृतक की मां द्वारा भी उसकी पहचान नहीं की गई थी। वास्तव में अभियोजन पक्ष यह साबित करने में असमर्थ रहा है कि वो कैमरा वास्तव में मृतक-जॉन बॉस्को से संबंधित है।

हालांकि मोबाइल फोन को ए-1 से हासिल किया गया है, लेकिन रिकॉर्ड पर  इस तथ्य को स्थापित करने के लिएकोई सबूत नहीं है कि सेल फोन मृतक-जॉन बोस्को या पीडब्लू -8 से संबंधित है, क्योंकि वो उनके नाम पर खरीदा नहीं गया था।

इसके अलावा अभियोजन पक्ष उस व्यक्ति की जांच करने में असफल रहा जिसके नाम पर सेल फोन खरीदा गया था, यह दिखाने के लिए कि वह मूलतः पीडब्ल्यू -8 से संबंधित है, पीडब्ल्यू -8 के सिद्धांत को साबित करने के लिए कि उसने खरीदा था और उसे मृतक जॉन-बॉस्को को दिया था। इसके अलावा  भौतिक वस्तुओं जैसे, नोकिया फोन और मोटर बाइक का मामले में कोई असर नहीं है। नोकिया फोन अभियुक्त नंबर  1 से बरामद किया गया था और यह ऐसा नहीं है कि इसका इस्तेमाल अपराध करने के लिए किया गया था और इसी तरह से बरामद की गई मोटर साइकिल अभियुक्त नंबर 3 के पिता की था और अभियोजन पक्ष द्वारा कोई सबूत नहीं दिया गया है कि  इस मामले पर कैसे इन वस्तुओं का असर होगा।वास्तव में किसी भी गवाह ने कैमरे की पहचान नहीं की है या जॉन बॉस्को के सामान 18 को बताया है।

 कथित बयान धारा 27 में निहित जनादेश के बावजूद सरल कारण के लिए अस्वीकार्य है क्योंकि इसके परिणामस्वरूप जांच में कुछ नए तथ्य सामने नहीं आए हैं। पुलिस का ये दावा कि आरोपी से ये चीजें बरामद की गई हैं, हो सकता है कि इन्हें पुलिस ने ही प्लांट किया हो।  अदालत ने यह भी कहा कि अभियोजन पक्ष सारी आवश्यक परिस्थितियों को साबित करने में असफल रहा है जिससे इसकी सारी कड़ियां जुड़ सकें और ये कहा जा सके कि आरोपी को छोड़कर किसी और ने अपराध नहीं किया है।