व्यावसायिक योग्यता के बिना कोई डॉक्टरी प्रैक्टिस नहीं: सुप्रीम कोर्ट ने ‘परम्परा वैद्य’ की याचिका रद्द की [निर्णय पढ़ें]

आजादी के 70 साल बाद भी जिनके पास कोई ज्ञान नहीं है या मान्यता प्राप्त योग्यता नहीं है, वे दवाओं का अभ्यास कर रहे हैं और हजारों और लाखों लोगों के जीवन के साथ खेल रहे हैं, बेंच ने कहा। 

 सुप्रीम कोर्ट ने 2003 केरल हाईकोर्ट के फैसले को बरकरार रखा है कि जिसमें यह तय किया गया है कि जो लोग निर्धारित योग्यता पूरी नहीं करते और प्रासंगिक कानून के तहत विधिवत पंजीकृत नहीं हैं, उन्हें परम्परा वैद्य के रूप में अभ्यास करने की अनुमति नहीं दी जा सकती।  न्यायमूर्ति आरके अग्रवाल और न्यायमूर्ति मोहन एम शांतनागौदर की पीठ ने कहा कि अनुचित, अप्रशिक्षित नीम हकीमों की संख्या पूरे समाज के लिए एक बड़ा खतरा है और वो विज्ञान के क्षेत्र में अनुमोदित संस्थान से अपेक्षित प्रशिक्षण और शिक्षा के बिना लोगों के जीवन के साथ खेल रहे हैं।

सिद्धा / यूनानी / आयुर्वेद प्रणाली में अभ्यास करने वाले ‘परंपरा वैद्य’ ने उच्च न्यायालय द्वारा  रिट याचिकाओं को खारिज करने पर  इसे सर्वोच्च न्यायालय से चुनौती दी थी।

 कोई पेशेवर योग्यता, कोई दवा अभ्यास नहीं

न्यायालय ने त्रावणकोर-कोचीन मेडिकल प्रैक्टिशनर्स अधिनियम, 1953 के साथ-साथ भारतीय चिकित्सा केन्द्रीय परिषद अधिनियम, 1970 के प्रासंगिक कानूनों का भी उल्लेख किया और कहा कि पंजीकृत व्यक्तियों को विभिन्न प्रकार की दवाइयों के अभ्यास से निषिद्ध किया गया है। अदालत ने यह भी कहा कि इस मामले में याचिकाकर्ता ऐसी पेशेवर योग्यता से लैस नहीं हैं, जैसा कि मान्य है, उनके पास उस प्रयोजन के लिए किसी मान्यताप्राप्त संस्था से निर्धारित डिप्लोमा या डिग्री नहीं है। यहां तक ​​कि किसी भी व्यक्ति ने मान्यताप्राप्त संस्थान से निर्धारित डिप्लोमा या डिग्री हासिल की भी है, जब तक कि वह आईएमसीसी अधिनियम के प्रावधानों के तहत पंजीकृत न हो, तब तक औषधि अभ्यास करने का हकदार नहीं होगा। बेंच ने आगे कहा: “इससे पहले, डॉक्टर, वैद्य और हकीम के लिए शिक्षण और प्रशिक्षण देने वाली बहुत कम संस्थाएं थीं लेकिन स्थिति बदल गई है और स्वदेशी दवाइयों में शिक्षा देने वाली संस्थाओं की संख्या बहुत अच्छी है …”

चिकित्सकीय देखभाल और उपचार की आवश्यकता वाले व्यक्तियों की उचित स्वास्थ्य देखभाल के लिए जीवन के अधिकार के अनुसार चिकित्सा का अभ्यास करना 

पीठ ने यह भी पाया कि किसी पेशे का अभ्यास करने या किसी पेशे, व्यापार या व्यवसाय को चलाने के लिए  आवश्यक व्यावसायिक या तकनीकी योग्यता से संबंधित किसी कानून के अधीन है।

पेशेवर योग्यता और व्यावसायिक आचरण के मानक के संबंध में इस अधिकार के प्रयोग पर नियामक उपाय लागू किए गए हैं, न केवल चिकित्सकों के अधिकारों को ध्यान में रखते हुए बल्कि जीवन के अधिकार और व्यक्तियों की स्वास्थ्य देखभाल की आवश्यकता को ध्यान में रखते हुए भी, अदालत ने कहा।

उनकी अपील को खारिज करते हुए बेंच ने टिप्पणी की: “स्वदेशी दवाओं के बारे में थोड़ा ज्ञान रखने वाले व्यक्ति जो मान्यता प्राप्त और अनुमोदित योग्यता वाले नहीं है, वे चिकित्सक बन रहे हैं और हजारों और लाखों लोगों के जीवन के साथ खेल रहे हैं। कभी कभी ये नीम हकीम बड़ी गड़बड़  कर देते हैं जिससे  अनमोल जीवन खो जाता है .. सरकार इस तरह के झोलाछाप डॉक्टरों को रोकने के लिए सावधानी बरत रही थी। “

 

Got Something To Say:

Your email address will not be published. Required fields are marked *


*