सुप्रीम कोर्ट ने मोबाइल, बैंक, पासपोर्ट आदि में आधार की अनिवार्यता की डेडलाइन बढ़ाई, कहा फैसला आने तक नहीं होगा अनिवार्य

आधार की अनिवार्यता पर सुनवाई कर रही सुप्रीम कोर्ट की पांच जजों की संविधान पीठ ने एक अहम कदम उठाते हुए आधार की अनिवार्यता की डेडलाइन बढ़ा दी है।

चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा, जस्टिस ए के सीकरी, जस्टिस ए एम खानविलकर, जस्टिस डीवाई चंद्रचूड और जस्टिस अशोक भूषण की संविधान पीठ ने सोमवार को 31 मार्च की डेडलाइन को बढ़ाते हुए कहा कि सुप्रीम कोर्ट की पीठ द्वारा सुनवाई पूरी कर फैसला देने तक ये डेडलाइन रहेगी।

पीठ ने साफ किया कि ये आदेश आधार एक्ट की धारा सात में सिर्फ सब्सिडी और सर्विसेज पर लागू नहीं होगा।इसके अलावा फैसला आने तक बैंक, मोबाइल, पासपोर्ट व अन्य सभी के लिए आधार को अनिवार्य नहीं बनाया जा सकता।दरअसल तत्काल में पासपोर्ट  के लिए आधार की अनिवार्यता को लेकर सुप्रीम कोर्ट में वकील वृंदा ग्रोवर ने  याचिका दाखिल की थी।

याचिका में कहा गया कि जनवरी 2018 में जारी पासपोर्ट नियमों के तहत तत्काल योजना में नया पासपोर्ट बनवाने या नवीनीकरण के लिए आधार को अनिवार्य बना दिया गया है।

सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की ओर से पेश वरिष्ठ वकील अरविंद दातार ने कहा कि  उन्होंने तत्काल में पासपोर्ट रिन्यू का आवेदन दिया तो उनका पुराना पासपोर्ट रद्द कर दिया गया। अब नए पासपोर्ट के लिए आधार नंबर देने को कहा जा रहा है।  पासपोर्ट अधिकारियों ने आधार के बिना पासपोर्ट रिन्यू करने से इंकार कर दिया है। जबकि सुप्रीम कोर्ट के आदेश के मुताबिकआधार सिर्फ कल्याणकारी योजनाओं के लिए ही अनिवार्य है। उन्हें तीन दिन के भीतर पासपोर्ट चाहिए क्योंकि उन्हें एक सेमिनार में हिस्सा लेने ढाका जाना है।

 वहीं AG के के वेणुगोपाल ने कहा कि सामान्य पासपोर्ट बनवाने के लिए आधार जरूरी नहीं है। जबकि तत्काल में पासपोर्ट 24 से 72 घंटे के बीच बन जाता है।

गौरतलब है कि इस संबंध में 15 दिसंबर 2017 को जारी अंतरिम आदेश में सुप्रीम कोर्ट ने आधार को लेकर डेडलाइन 31 मार्च 2018 कर दी थी।

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