मेडिकल कॉलेज रिश्वत मामला: आरटीआई से खुलासा हुआ कि CJI ने इलाहाबाद HC जज को हटाने के लिए राष्ट्रपति सचिवालय को पत्र लिखा

इलाहाबाद उच्च न्यायालय के जज न्यायमूर्ति नारायण शुक्ला के खिलाफ प्रतिकूल टिप्पणी करने वाली इन-हाउस कमेटी की रिपोर्ट के आधार पर  भारत के मुख्य न्यायाधीश दीपक मिश्रा  ने राष्ट्रपति के सचिवालय को पत्र लिखकर जज के खिलाफ हटाने की कार्यवाही शुरू करने का अनुरोध किया है।

CJI मिश्रा ने पिछले साल नवंबर में न्यायमूर्ति शुक्ला के खिलाफ जांच शुरू की थी और मद्रास उच्च न्यायालय की मुख्य न्यायाधीश इंदिरा बनर्जी, सिक्किम उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश एसके अग्निहोत्री और मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय के न्यायमूर्ति पीके जयसवाल की  तीन सदस्यीय समिति की स्थापना की थी।

उसके बाद मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया के की अनुमति के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट के आदेशों के बावजूद छात्रों को एक निजी मेडिकल कॉलेज में दाखिले की अनुमति देने के लिए जांच की गई।

समिति ने हाल ही में अपनी जांच का निष्कर्ष निकाला और कथित तौर पर उनके खिलाफ कुछ प्रतिकूल टिप्पणियां कीं। उन्होंने पाया कि उन्होंने “न्यायिक जीवन के मूल्यों को अपमानित किया, अपने कार्यालय की महिमा, सम्मान और विश्वसनीयता को कम किया।”

CJI  ने तब उसके पास से सभी न्यायिक कार्य हटाए जाने का निर्देश दिया था।

 पारस नाथ सिंह द्वारा दायर सूचना अधिकार के जवाब में अब पुष्टि हुई है कि मुख्य न्यायाधीश ने न्यायाधीश के खिलाफ हटाने की कार्यवाही शुरू करने की मांग की है।सिंह के आवेदन में मांग की गई थी:

  1. तारीख, जिस पर राष्ट्रपति सचिवालय को इलाहाबाद उच्च न्यायालय के न्यायमूर्ति नारायण शुक्ल के खिलाफ महाभियोग की कार्यवाही शुरू करने के संबंध में भारत के मुख्य न्यायाधीश से एक पत्र या सिफारिश मिली;
  2. भारत के मुख्य न्यायाधीश से प्राप्त अनुलग्नक के साथ पत्र या सिफारिश की प्रमाणित प्रति;
  3. इस मामले में सचिवालय द्वारा अपनाई गई प्रक्रिया;
  4. भारत के राष्ट्रपति द्वारा दिए गए पत्र या सिफारिश पर किए गए नोट की प्रमाणित प्रतिलिपि या आदेश;
  5. राष्ट्रपति सचिवालय आईडी नोट की प्रमाणित प्रतिलिपि, जिसमें पत्र या सिफारिश को केंद्रीय कानून और न्याय मंत्रालय और प्रधान मंत्री कार्यालय को भेजा गया था या भेजा जाएगा;
  6. अब तक CJI के उक्त पत्र या सिफारिश पर की गई कार्रवाई का पूरा विवरण।

जवाब में राष्ट्रपति के सचिवालय ने पुष्टि की कि उसे सीजीआई के कार्यालय से 2 फरवरी, 2018 को एक पत्र मिला, जिसमें समिति के लगाए अभियोग के आधार पर न्यायमूर्ति शुक्ला के खिलाफ हटाने की कार्यवाही शुरू करने की मांग थी । इसमें कहा गया है कि ये पत्र  “विचाराधीन” है। हालांकि प्रतिक्रिया व  अन्य सवालों पर चुप्पी है, जिन्हें आवेदन में मांगा गया था।

एक बार जब सीजीआई के पत्र को स्वीकार किया जाता है तो उपराष्ट्रपति, जो राज्यसभा के अध्यक्ष हैं, न्यायाधीश (जांच) अधिनियम, 1968 के तहत मुख्य न्यायाधीश के साथ परामर्श करके तीन सदस्यीय जांच समिति का गठन करेंगे। यह पैनल तब जांच करेगा। इन-हाउस कमेटी द्वारा लगाए गए आरोप और उनकी सलाह के आधार पर  यह निर्णय लिया जाएगा कि क्या राज्यसभा में महाभियोग प्रस्ताव पर बहस की जाएगी।

Source: Lawyers Collective

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