ASG तुषार मेहता को 2G केस में विशेष लोक अभियोजक बनाने पर CPIL की अवमानना याचिका सुप्रीम कोर्ट ने खारिज की

सुप्रीम कोर्ट में जस्टिस अरूण मिश्रा और जस्टिस नवीन सिन्हा की पीठ ने ASG तुषार मेहता को 2G केस में विशेष लोक अभियोजक बनाने पर सेंटर फॉर पब्लिक इंटरेस्ट लिटिगेशन ( CPIL) की ओर से दाखिल अवमानना याचिका को खारिज कर दिया है।

सोमवार को सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने सिर्फ ट्रायल के लिए ही विशेष लोक अभियोजक नियुक्त किया था और अब ट्रायल पूरा हो चुका है तो अपील के लिए केंद्र किसी अन्य की नियुक्ति के लिए स्वतंत्र है। कोर्ट ने कहा कि इस मामले में केंद्र द्वारा किसी तरह की अवमानना नहीं की गई है।

वहीं पीठ ने विशेष लोक अभियोजक आनंद ग्रोवर की अर्जी को मंजूर करते हुए उन्हें इस पद से मुक्त कर दिया।

इस दौरान याचिकाकर्ता की ओर से पेश प्रशांत भूषण ने कोर्ट में कहा कि ASG तुषार मेहता की इस तरह नियुक्ति सुप्रीम कोर्ट के आदेशों का उल्लंघन है।

वहीं AG के के वेणुगोपालन ने कहा कि आनंद ग्रोवर खुद ही इससे मुक्त होना चाहते हैं। वैसे भी वो आदेश ट्रायल कोर्ट के लिए था और ट्रायल पूरा हो चुका है। इस केस में तमाम आरोपी बरी हो चुके हैं।

दरअसल 2 जी स्पेक्ट्रम मामले में अपील / संशोधन या अन्य कार्रवाई के लिए अभियोजन पक्ष की ओर से केंद्र सरकार के अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता की विशेष लोक अभियोजक के तौर पर नियुक्ति के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में अवमानना याचिका दाखिल की गई थी।

 सीबीआई द्वारा जांच किए गए इस केस में विशेष अदालत ने सभी आरोपियों को बरी कर दिया था। याचिका में आरोप लगाया गया कि केंद्र सरकार ने सर्वोच्च न्यायालय के 11.04.2011 और 02.09.2014 के सिविल अपील नंबर 10660/ 2010 पर निर्णय / आदेशों के तहत विशिष्ट निर्देशों की अवहेलना की है जिसमें न्यायालय ने 2 जी घोटाले से संबंधित मामले में वरिष्ठ  वकील आनंद ग्रोवर को विशेष लोक अभियोजक के रूप में नियुक्त किया था। सरकार ने अधिसूचना जारी कर  556 (ई)  08 फरवरी, 2018 को एएसजी तुषार मेहता की  विशेष सरकारी अभियोजक के रूप में आनंद ग्रोवर की जगह नियुक्ति की है।

गौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट ने पहले यूयू ललित को 2 जी मामले में विशेष अभियोजक के रूप में नियुक्त किया था। जब उन्हें सर्वोच्च न्यायालय में न्यायाधीश के रूप में नियुक्त किया गया तो कोर्ट ने अभियोजक के रूप में वरिष्ठ अधिवक्ता आनंद ग्रोवर को नियुक्त किया। याचिका के अनुसार  वर्तमान सरकार के वरिष्ठ कानून अधिकारी तुषार मेहता की विशेष सरकारी अभियोजक के तौर पर नियुक्ति कर  उत्तरदाता ने सुप्रीम कोर्ट द्वारा दिए गए 02 सितंबर 2014 के आदेश का पूर्ण रूप से उल्लंघन किया है। याचिकाकर्ता ने यह भी निवेदन किया कि नए अभियोजक की नियुक्ति की अधिसूचना इस आदेश के विपरीत है  और इस प्रकार यह शून्य है।  “उत्तरदाता के पास इस माननीय न्यायालय के फैसले को हटाने का कोई अधिकार नहीं है और यह अधिनियम कुछ भी नहीं है, बल्कि इस माननीय न्यायालय द्वारा पारित आदेशों का घोर उल्लंघन है। यह विशिष्ट कार्य बहुत स्पष्ट रूप से प्रतिवादी के दुर्भावनापूर्ण इरादों को दर्शाता है। “

याचिकाकर्ता ने सरकार के खिलाफ अवमानना ​​कार्रवाई करने और नए अभियोजक की नियुक्ति की अधिसूचना को रद्द करने के लिए प्रार्थना की थी।

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