पोलिश संसद ने जूडिशियरी पर पॉलिटिकल कंट्रोल का विवादास्पद कानून पारित किया

पोलैंड संसद ने कानून पारित किया है जिस्के तहत सुप्रीम कोर्ट के तमाम जजों को पद से हटा दिया जाएगा। कंजरवेटिव लॉ एंड जस्टिस पार्टी की अगुवाई में पोलैंड की संसद ने ये कानून पारित किया है। ये कानून ऊपरी सदन ने 55-23 के अंतर से पारित किया गया। संसद में इसके लिए शनिवार को 15 घंटे की बहस हुई है और कानून पारित किया गया  है। इससे पहले गुरुवार को निचले सदन ने इसे पारित किया था।

सत्ताधारी पार्टी ने इसके लिए कानून पास कर लीगल रिफॉर्म किया है। इस कानून के तहत राष्ट्रपति को ये अधिकार दिया गया है कि वह सुप्रीम कोर्ट के जजों के कामकाज को रेग्युलेट करें। इससे पहले उस स्वतंत्र निकाय को खत्म कर दिया गया जिसके जरिये जजों के नामांकन की प्रक्रिया होती थी। इस कानून के बाद सड़कों पर प्रदर्शन शुरू हुई है कि राष्ट्रपति बिल पर वीटो करे।
यूरोपियन कमिशन के वीसी ने कहा है कि ये रिफॉर्म न्यायिक स्वतंत्रता को खत्म कर देगा। क्योंकि जूडिशियरी को पॉलिटिकल कंट्रोल में लाया जा रहा है। ईयू में भी इसके रिवर्स की बात कही जाएगी। यूएन के स्टेट डिपार्टमेंट ने कहा है कि जूडिशियल रिफॉर्म के कारण ये सुनिश्चित हो कि पोलैंड के संविधान का उल्लंघन न हो। स्वतंत्र जूडिशियरी के सिद्धांत का पालन हो औऱ न्यायपालिका की शक्ति अलग रखने के सिद्धांत का पालन सुनिश्चित रहना होगा। वहीं हंग्री के पीएम वी. ऑर्बेन ने कहा है कि पोलैंड के खिलाफ अदालती परीक्षण कामयाब नहीं होगी। हंगी तमाम लीगल विकल्प देखेगा व पोल्स के साथ रहेगा।

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  • Anand Kapoor Pandey(Advocate) says:

    Declaring sec.497 of i p c as unconstitutional will wrongly benifit those marriage parteners who themselves do not retain sanctity of faith to thier parteners and moreover they will provoke others to do the same . This may cause a great loss in moral strongness of matrimonial relations in india.